दिल्ली
2 महीने पहले
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दिल्ली हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और वकील जय अनंत देहाद्राई के बीच चल रहा एक पालतू रॉटवीलर कुत्ते के संरक्षण का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने मामले पर संज्ञान लिया। पीठ ने देहाद्राई के वरिष्ठ अधिवक्ता से सवाल किया कि क्या वे इस बात पर राजी हैं कि महुआ मोइत्रा को हेनरी नाम के उस पालतू कुत्ते से मिलने की इजाजत दी जाए। इस कानूनी प्रक्रिया में अब अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
दोनों पक्षों के लिए तय समय सीमा
अदालत में हुई चर्चा के दौरान देहाद्राई के वकील ने इस तरह की किसी भी व्यवस्था के प्रति असहमति के संकेत दिए। उन्होंने तर्क दिया कि इसके पीछे पुख्ता कारण हैं और कुत्ते का हित सर्वोपरि है। वकील ने दावा किया कि उन्हें धमकाने की कोशिश की गई थी। इसके जवाब में अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी। साथ ही, न्यायपीठ ने यह भी साफ कर दिया कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपनी बात रखने के लिए 5-5 मिनट का समय दिया जाएगा।
जिला अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब महुआ मोइत्रा ने जिला अदालत में जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया। इसमें उन्होंने मांग की थी कि पालतू कुत्ते की साझा कस्टडी को लेकर उनके बीच हुए मौखिक समझौते का पालन कराया जाए। हालांकि, जिला अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। उस फैसले के खिलाफ ही सांसद ने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिला अदालत के अंतरिम आदेश में साझा कस्टडी की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था।
सांसद की विशेष मांग
महुआ मोइत्रा ने अदालत के सामने एक अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें हर महीने 10 दिन के लिए हेनरी का संरक्षण मिलना चाहिए। इस मामले पर 10 नवंबर, 2025 को जिला अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि सांसद के पक्ष में ऐसी साझा कस्टडी का कोई प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता है। इसी कारण अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था।
अदालत का रुख और भविष्य की प्रक्रिया
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हेनरी की कस्टडी किसके पास रहेगी और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। हाई कोर्ट अब दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनेगा और उसके बाद ही कोई ठोस कानूनी निर्देश जारी करेगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में कानून पालतू पशु के कल्याण और उसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। अदालत हर पहलू की समीक्षा कर और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अंतिम फैसला लेगी। फिलहाल मामले को अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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