दिल्ली को बड़ी राहत: अमित शाह ने बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर का किया उद्घाटन, अब मिनटों में तय होगा सफर
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3 घंटे पहले
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दिल्ली की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार
राजधानी दिल्ली की सड़कों पर लगने वाले जाम से जूझ रहे लाखों यात्रियों के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर और मुकरबा चौक अंडरपास का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया। इस नई परियोजना के शुरू होने से न केवल दिल्ली के विभिन्न इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच का सफर भी काफी सुगम हो जाएगा। इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मयूर विहार से एम्स तक का लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह से सिग्नल-फ्री हो गया है।
कॉरिडोर की तकनीकी विशेषताएं
बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर को सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 के बीच तैयार किया गया है। यदि इसकी लंबाई की बात करें, तो इसकी मुख्य संरचना 3.5 किलोमीटर लंबी है, लेकिन रैंप और लूप्स को जोड़ने के बाद इसकी कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर तक पहुँच जाती है। यह कॉरिडोर कुल छह लेन का है, जिसमें दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए, इस सड़क मार्ग पर सिर्फ कारों और अन्य वाहनों के लिए ही जगह नहीं छोड़ी गई, बल्कि पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए अलग से फुटपाथ और साइकिल ट्रैक का भी निर्माण किया गया है।
ईस्ट दिल्ली से एम्स तक का सफर अब तेज
इस परियोजना के क्रियान्वयन के बाद मयूर विहार फेज-1 और नोएडा से आने वाले वाहन चालक अब एम्स तक निर्बाध गति से पहुँच सकेंगे। अनुमान है कि इस मार्ग के चालू होने से व्यस्ततम समय में यात्रियों का करीब 20 से 25 मिनट का कीमती समय बचेगा। इसके साथ ही, आईएनए और आईआईटी दिल्ली जाने वाले लोगों को भी ट्रैफिक जाम से काफी निजात मिलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर संबंधित विभागों और अधिकारियों की कार्यशैली की प्रशंसा की है।
11 साल के इंतजार के बाद मिली सफलता
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य लगभग 11 साल से जारी था। परियोजना में हो रही देरी के कारणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कार्यभार संभाला, तो उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया था। उस दौरान यह पाया गया कि कई अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC और अन्य कानूनी अनुमतियां लंबे समय से अटकी हुई थीं। सरकार ने इन सभी प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की पहल की, जिसके बाद निर्माण कार्य को गति मिली और आज यह परियोजना दिल्ली की जनता को समर्पित की गई है।
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