उत्तराखंड हाईकोर्ट का सरकार से सवाल: देश को खतरा नहीं तो पाकिस्तानी सिख परिवार को क्यों भेजें वापस? उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून में रह रहे एक पाकिस्तानी सिख परिवार के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि परिवार से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है तो उसे भारत से बाहर न किया जाए।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक अहम निर्देश में कहा है कि देहरादून में रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार को, यदि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, तो वापस न भेजा जाए। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ इस परिवार को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

अदालत ने सरकार से क्या कहा

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है, तो उन्हें भारत से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि देश की सुरक्षा को कोई खतरा होता है, तो ऐसे व्यक्ति को निश्चित रूप से वतन से निकाला जा सकता है।

न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं को निर्देश प्राप्त करने और हलफनामे के माध्यम से अपना पक्ष दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की गई है।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता मनजीत वर्ष 2019 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से भारत आए थे। तब से यह परिवार देहरादून के वसंत विहार इलाके में दीर्घावधि वीजा पर रह रहा है। इस वीजा की अवधि बाद में बढ़ाई गई थी और यह दिसंबर 2026 तक वैध है।

विवाद उस समय खड़ा हुआ जब उत्तराखंड सरकार ने 31 मई को एक नोटिस जारी कर परिवार को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया। यह नोटिस परिवार को 2 जून को मिला, जिसके बाद उन्होंने इस आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

परिवार में कौन-कौन शामिल

इस परिवार में तीन बच्चे हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी ‘बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी’ की पढ़ाई कर रही है, जबकि एक नाबालिग बेटा भी है। याचिकाकर्ता की दलील है कि परिवार को 2026 के आखिर में उनके वैध वीजा की अवधि समाप्त होने तक भारत में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सरकार का तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि परिवार फिलहाल जिस इलाके में रह रहा है, वहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का मुख्यालय स्थित है। सरकार का कहना था कि उस इलाके में परिवार के लगातार रहने से सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं पैदा हो सकती हैं। इसी आधार पर सरकार ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि परिवार को पाकिस्तान वापस भेजा जाए।

कोर्ट में किसने रखा पक्ष

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार गुगलानी अदालत में पेश हुए। वहीं, केंद्र की ओर से अधिवक्ता सौरव अधिकारी और राज्य सरकार की ओर से स्वाति वर्मा ने पक्ष रखा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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