मानसून में देहरादून की ये 5 जगहें हैं किसी जन्नत से कम नहीं, स्विट्जरलैंड जैसा आएगा अहसास उत्तराखंड 2 महीने पहले 80
मानसून की बारिश में दून घाटी का नजारा पूरी तरह बदल जाता है और यहां की वादियां किसी खूबसूरत पर्यटन स्थल से कम नहीं लगतीं। यदि आप सुकून की तलाश में हैं, तो देहरादून के इन 5 स्थानों की यात्रा जरूर करें।

देहरादून में मानसून का जादू

मानसून की पहली फुहारों के साथ ही देहरादून की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। दून घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों अपने चरम पर है। चारों ओर बिखरी हरियाली, पहाड़ों को छूती हुई धुंध और रिमझिम बारिश के बीच यह जगह किसी जन्नत जैसा अहसास कराती है। यदि आप शहर की भीड़भाड़ और दिल्ली-एनसीआर की उमस से दूर कुछ पल शांति के बिताना चाहते हैं, तो देहरादून की ये पांच जगहें आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं।

मालदेवता

देहरादून के सबसे खूबसूरत पिकनिक स्पॉट में से एक मालदेवता अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। मानसून के दौरान यहां का नजारा देखने लायक होता है। नदी का कल-कल बहता पानी और आसपास के हरे-भरे पहाड़ पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए यह जगह एक शानदार लोकेशन है।

किमडी गांव

यदि आप शांति की तलाश में हैं, तो किमडी गांव आपको जरूर जाना चाहिए। यहां की सादगी और प्राकृतिक शांति आपको शहर के शोर से बिल्कुल दूर ले जाती है। बारिश के मौसम में यहां के खेतों और पहाड़ों का दृश्य किसी स्विट्जरलैंड जैसा सुंदर नजर आता है। यह स्थान उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के करीब रहना पसंद करते हैं।

अन्य खास लोकेशंस

देहरादून में मानसून का आनंद लेने के लिए कई अन्य छिपे हुए स्थान भी हैं। इन जगहों पर जाकर आप बादलों की अठखेलियां करीब से देख सकते हैं। मानसून में यहां का वातावरण इतना सुहावना होता है कि आपका मन खुश हो जाएगा। स्थानीय लोग और पर्यटक इन रास्तों पर घूमना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद करते हैं।

यात्रा के लिए टिप्स

  • मानसून में पहाड़ी इलाकों में जाते समय सावधानी बरतें।
  • अपने साथ जरूरी रेनकोट और छाता साथ रखें।
  • पहाड़ी रास्तों पर ड्राइव करते समय सतर्कता बरतें।
  • प्रकृति का सम्मान करें और इन स्थानों पर गंदगी न फैलाएं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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