राजस्थान
2 महीने पहले
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राजस्थान के दौसा में हुए भीषण बस हादसे के बाद गठित की गई जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच दल की इस रिपोर्ट में घटनास्थल के निरीक्षण से लेकर राहगीरों, दुर्घटनाग्रस्त बस के चालक, ट्रेलर चालक और अन्य गवाहों के बयानों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में सामने आए बिंदु न केवल हैरान करने वाले हैं, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद जिला प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कई जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
साइन बोर्ड की लापरवाही और गलत दिशा सूचक बने हादसों की वजह
जांच दल की रिपोर्ट में सबसे बड़ी खामी एक्सप्रेसवे पर लगाए गए साइन बोर्ड और दिशा सूचकों को लेकर बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, हादसे वाली जगह के आसपास ऐसे कोई साइन बोर्ड नहीं लगे थे जो तेज रफ्तार में आ रहे वाहन चालक को दूर से साफ दिखाई दे सकें। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जयपुर की तरफ जाने के लिए जो दिशा सूचक लगाए गए थे, वे भी बेहद त्रुटिपूर्ण और गलत तरीके से बने थे।
रिपोर्ट में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि एक्सप्रेसवे पर लगे इन साइन बोर्ड को समझने के लिए वाहन चालकों को ऐन मौके पर अपनी गाड़ी की रफ्तार को काफी कम करना पड़ता था। अचानक रफ्तार कम होने की वजह से पीछे से आ रहे अन्य वाहनों के टकराने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। जांच दल ने आशंका जताई है कि बुधवार को हुआ दर्दनाक बस हादसा भी इसी भ्रम और रफ्तार कम करने के प्रयास के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि, हादसे की अंतिम वजह पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही आधिकारिक रूप से तय हो पाएगी।
राहत और बचाव कार्य का मिनट-टू-मिनट ब्योरा
दौसा की जिला कलेक्टर सौम्या झा ने हादसे के बाद की गई प्रशासनिक कार्रवाई और राहत दल के पहुंचने के समय का पूरा ब्योरा साझा किया है। उनके अनुसार, राहत दल ने सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की थी। घटनाक्रम का समय इस प्रकार रहा:
- दोपहर 2 बजकर 30 मिनट: एक्सप्रेसवे पर यह भीषण हादसा हुआ था।
- दोपहर 2 बजकर 40 मिनट: जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस को हादसे की पहली सूचना मिली थी।
- दोपहर 2 बजकर 45 मिनट: सूचना मिलने के मात्र 5 मिनट के भीतर स्थानीय पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंच गई थी।
- दोपहर 2 बजकर 48 मिनट: NHAI की आपातकालीन टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी।
- दोपहर 2 बजकर 50 मिनट: घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच गई थी।
दमकल पहुंचने में लगे 22 मिनट, एक्सप्रेसवे पर फायर टेंडर की कमी उजागर
जिला कलेक्टर सौम्या झा ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ी को मौके पर पहुंचने में करीब 22 मिनट का समय लगा। हालांकि, दौसा से दुर्घटनास्थल की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है, और इस लिहाज से दमकल कर्मियों ने बेहद तत्परता दिखाते हुए केवल 22 मिनट में यह दूरी तय की। लेकिन इस घटना ने एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के एक बड़े अभाव को उजागर कर दिया है।
इतने बड़े एक्सप्रेसवे पर खुद के फायर टेंडर की व्यवस्था नहीं होना एक गंभीर चिंता का विषय है। यदि एक्सप्रेसवे पर ही दमकल गाड़ियां तैनात होतीं, तो राहत कार्य और तेजी से शुरू किया जा सकता था। इस कमी को देखते हुए प्रशासन ने NHAI को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द एक्सप्रेसवे पर अपने स्तर पर फायर टेंडर की स्थाई व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि आपातकालीन स्थिति में समय रहते आग पर काबू पाया जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
अवैध पार्किंग, शराब के ठेके और आवारा पशु भी बढ़ा रहे हैं खतरा
एक्सप्रेसवे पर केवल तकनीकी खामियां ही नहीं, बल्कि कई अन्य अवैध गतिविधियां भी आए दिन हादसों को न्योता दे रही हैं। जिला कलेक्टर ने इस बात को स्वीकार किया कि एक्सप्रेसवे पर घूम रहे आवारा और बेसहारा पशु दुर्घटनाओं का एक मुख्य कारण बनते हैं। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के किनारे अनाधिकृत रूप से की जाने वाली वाहनों की पार्किंग भी बेहद खतरनाक साबित हो रही है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सड़क किनारे अवैध रूप से बनी थड़ियों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध शराब के ठेके भी इन हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि, पुलिस और स्थानीय प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाकर इन अवैध थड़ियों और शराब के अड्डों को हटाने की कार्रवाई करता है, लेकिन इसके बावजूद ये फिर से सक्रिय हो जाते हैं। अब इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद, एक्सप्रेसवे की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है और प्रशासन ने इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है।
गुणवत्ता की जांच के लिए बनेगी राज्य स्तरीय कमेटी, दिल्ली में होगी बैठक
दौसा बस हादसे की गंभीरता को देखते हुए अब बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जिला कलेक्टर सौम्या झा के अनुसार, इस पूरे एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की गहराई से जांच करने के लिए जल्द ही एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव की महत्वपूर्ण बैठक के बाद अब अगले दिन देश की राजधानी दिल्ली में NHAI के चेयरमैन भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक आपातकालीन बैठक करने वाले हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में दौसा जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ राजस्थान राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। इस बैठक में जांच रिपोर्ट के हर एक बिंदु पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के लिए कड़े फैसले लिए जाएंगे। प्रशासन का दृढ़ संकल्प है कि रिपोर्ट में उजागर की गई सभी खामियों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे किसी भी दुखद हादसे को टाला जा सके।
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