दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर खेला दांव, जानिए कौन हैं राजघराने से ताल्लुक रखने वाले यह नेता मध्य प्रदेश एक महीने पहले 52
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व विधायक और दतिया राजघराने के प्रमुख घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है, जहां उनका मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी से होगा।

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस बेहद महत्वपूर्ण सीट पर अपने पत्ते खोलते हुए अनुभवी नेता घनश्याम सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। दतिया उपचुनाव पर पूरे देश और प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां अपने कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है। अब कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह को टिकट मिलने के बाद इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार घनश्याम सिंह के कंधों पर अब पार्टी को जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

कौन हैं घनश्याम सिंह और क्या है उनका इतिहास?

घनश्याम सिंह दतिया के ऐतिहासिक राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और वर्तमान में वह दतिया राजघराने के मुखिया भी हैं। उनकी छवि क्षेत्र में एक बेहद सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में रही है। इससे पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा थी कि कांग्रेस पार्टी इस उपचुनाव में राजेंद्र भारती के परिवार के किसी सदस्य को अपना उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि, पार्टी आलाकमान ने घनश्याम सिंह के नाम पर मुहर लगाकर इन सभी अटकलों और कयासों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। घनश्याम सिंह लंबे समय से कांग्रेस के निष्ठावान सिपाही रहे हैं और अपनी बेबाक बयानबाजी तथा शानदार भाषण शैली के लिए जाने जाते हैं। दतिया और पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र सेवढ़ा दोनों ही इलाकों में उनकी गहरी राजनीतिक और सामाजिक पकड़ मानी जाती है।

चुनावी इतिहास: जीत और हार का उतार-चढ़ाव

घनश्याम सिंह का चुनावी सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने पहली बार साल 1993 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद साल 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, वह निराश नहीं हुए और साल 2003 के चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जोरदार वापसी करते हुए जीत का परचम लहराया। साल 2018 में पार्टी ने उन्हें दतिया की पड़ोसी सीट सेवढ़ा से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने भाजपा उम्मीदवार राधेलाल बघेल को शिकस्त दी थी। इसके बाद साल 2023 के विधानसभा चुनाव में वह फिर से सेवढ़ा से मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें भाजपा के प्रदीप अग्रवाल के हाथों पराजय झेलनी पड़ी थी। अब वह एक बार फिर अपने पुराने सियासी मैदान दतिया में उतर चुके हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी से होगा, जो पिछले आम चुनाव के दौरान सेवढ़ा से टिकट की दावेदारी पेश कर रहे थे।

पार्टी का भरोसा और विकास का संकल्प

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के नाम की सिफारिश मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन द्वारा दिल्ली स्थित आलाकमान को भेजी गई थी। वह काफी समय से दतिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए थे। टिकट की घोषणा होने के बाद घनश्याम सिंह ने अपनी रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सभी कार्यकर्ता और नेता एकजुट होकर पूरी ताकत के साथ यह चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने मतदाताओं से वादा किया कि उनकी राजनीति पूरी तरह से विकास पर केंद्रित होगी। घनश्याम सिंह ने जोर देकर कहा कि दतिया में पुरानी राजनीतिक व्यवस्था और सद्भाव को बहाल किया जाना जरूरी है, ताकि सभी समाजों और वर्गों के बीच आपसी भाईचारा बना रहे।

दतिया उपचुनाव का कार्यक्रम और महत्वपूर्ण तारीखें

दतिया उपचुनाव की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा तिथियों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। चुनाव का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:

  • नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि: दतिया उपचुनाव के लिए पर्चा भरने की आखिरी तारीख 13 जुलाई निर्धारित की गई है। संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के प्रत्याशी सोमवार को अपने दलबल के साथ नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
  • नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: उम्मीदवार अपना नाम 16 जुलाई तक वापस ले सकते हैं।
  • मतदान की तारीख: इस सीट पर जनता नए विधायक का चुनाव करने के लिए 30 जुलाई को अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी।
  • मतगणना और परिणाम: वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी, जिसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि दतिया की जनता ने किस पर भरोसा जताया है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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