बिहार
2 महीने पहले
83
विचारों
यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ
बिहार में 1 जून से बस किराए में की गई बढ़ोतरी का असर अब आम यात्रियों पर साफ दिखाई दे रहा है। बस किराए में अचानक 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि किए जाने के बाद दैनिक यात्रियों, छात्रों और मरीजों के लिए सफर करना काफी महंगा हो गया है। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों से पहले ही परेशान आम आदमी अब बस के बढ़े हुए किराए के बोझ तले दब गया है।
यात्रियों का दर्द और नाराजगी
दरभंगा बस स्टैंड पर यात्रियों ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। मुकुंद कुमार, जो दरभंगा से मुजफ्फरपुर की यात्रा कर रहे थे, ने बताया कि उन्हें किराए में हुई इस बढ़ोतरी की जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि पहले दरभंगा से मुजफ्फरपुर का किराया 99 रुपया था, लेकिन अब कंडक्टर से पता चलने पर ही असल स्थिति स्पष्ट होगी। इस अनिश्चितता और अचानक बढ़ोतरी ने उनका पूरा मासिक बजट बिगाड़ दिया है।
इसी तरह दरभंगा से छपरा जाने वाले मोहम्मद इम्तियाज ने भी अपनी चिंता साझा की। उनका कहना है कि पहले छपरा के लिए 293 रुपये का टिकट मिलता था, लेकिन 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद अब जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इम्तियाज के अनुसार, सरकार को अगर बढ़ोतरी करनी ही थी, तो इसे 2 से 3 प्रतिशत या अधिक से अधिक 5 प्रतिशत तक ही रखना चाहिए था। एक साथ 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ाना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।
छात्रों और मजदूरों पर सीधा असर
दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर जैसे जिलों से रोजाना हजारों लोग काम, पढ़ाई और इलाज के सिलसिले में यात्रा करते हैं। किराए में इस इजाफे से छात्र वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। इसके अलावा मजदूर वर्ग का कहना है कि पहले ही घर का खर्च चलाना मुश्किल था, अब बस के किराए में अतिरिक्त पैसे देने से उनके पास घर भेजने के लिए बचत कम हो जाएगी। मरीजों को भी अस्पताल तक पहुंचने के लिए अब पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
प्रशासन का अपना तर्क
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों और बसों के रखरखाव (मेंटेनेंस) पर आने वाले खर्चों को देखते हुए किराए में वृद्धि करना अपरिहार्य हो गया था। हालांकि, यात्रियों का तर्क है कि महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों पर एक साथ इतना बड़ा बोझ डालना पूरी तरह से अनुचित है।
Comments
0 comment