कांग्रेस और एनसीपी के विलय की सुगबुगाहट तेज, शीर्ष स्तर पर मंथन जारी महाराष्ट्र 2 महीने पहले 78
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और एनसीपी के बीच फिर से विलय को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

विलय की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण खबर निकलकर सामने आ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच फिर से विलय को लेकर उच्च स्तरीय बातचीत का दौर शुरू हो चुका है। यदि यह मंथन किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है, तो न केवल महाराष्ट्र की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

महाराष्ट्र इकाई पर केंद्रित है चर्चा

वर्तमान में विलय की यह पूरी कवायद मुख्य रूप से महाराष्ट्र की प्रादेशिक इकाई तक ही सीमित दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि एनसीपी अपने स्तर पर विलय के संभावित परिणामों और इसके राजनीतिक लाभ-हानि का सूक्ष्म विश्लेषण कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी इस प्रक्रिया में अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को भी काफी महत्व दे रहे हैं, ताकि किसी भी बड़े निर्णय से पहले पार्टी के भीतर आम सहमति बन सके।

पहले भी हुई थी कोशिश

दोनों दलों के एक होने का यह प्रयास नया नहीं है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पूर्व भी कांग्रेस और एनसीपी के दिग्गज नेताओं के बीच विलय के विषय पर गहन चर्चा हुई थी। हालांकि, उस समय कुछ अपरिहार्य राजनीतिक कारणों और आपसी मतभेदों के चलते यह प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ सकी। इसके तुरंत बाद चुनाव की घोषणा कर दी गई, जिसके चलते चुनावी व्यस्तताओं के बीच यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था।

बदल सकते हैं सियासी समीकरण

अब एक बार फिर दोनों दलों के बीच रुकी हुई बातचीत ने रफ्तार पकड़ी है। राजनीतिक विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि एनसीपी की आंतरिक रायशुमारी में विलय को सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो महाराष्ट्र में विपक्षी खेमे को एक नया और अत्यधिक शक्तिशाली संगठनात्मक ढांचा प्राप्त होगा। फिलहाल दोनों ही प्रमुख दलों के शीर्ष नेतृत्व इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि पर्दे के पीछे से नई चुनावी और रणनीतिक गोटियां तेजी से बिछाई जा रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप