दिल्ली में बवाल: RSS मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति जलाने पर कांग्रेस नेता उदित राज हिरासत में भारत 2 घंटे पहले 5
कांग्रेस नेता उदित राज को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों ने मनुस्मृति की प्रतियां जलाते हुए संविधान के सम्मान में नारेबाजी की।

विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब कांग्रेस नेता और ऑल इंडिया अनऑर्गनाइज़्ड वर्कर्स एंड एम्प्लॉईज़ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह घटना मंगलवार को केशव कुंज स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के मुख्य कार्यालय के बाहर घटी। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और डोमा परिसंघ के समर्थकों ने अचानक वहां पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न केवल नारेबाजी की बल्कि मनुस्मृति की प्रतियों और RSS की प्रतीकात्मक यूनिफॉर्म को आग के हवाले कर दिया।

प्रदर्शन का मूल कारण

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का साफ कहना था कि भारत का संचालन देश के संविधान से होना चाहिए, न कि मनुस्मृति से। इस हंगामे के पीछे की बड़ी वजह उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई एक हालिया घटना को माना जा रहा है। वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक सभा के बाद उस जगह पर एक विवादित शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे दलित समुदाय के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।

उदित राज का बयान और आरोप

हिरासत में लिए जाने के बाद उदित राज ने जानकारी दी कि वे केशव कुंज स्थित RSS मुख्यालय पहुंचे थे और उन्होंने वहां मनुस्मृति जलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया गया है और राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसके विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया।

ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीति

अपनी गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बात करते हुए उदित राज ने इस कृत्य को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की विरासत से जोड़कर देखा। उन्होंने याद दिलाया कि 25 दिसंबर, 1927 को बाबा साहब ने जातिगत भेदभाव का विरोध करते हुए मनुस्मृति जलाई थी। उदित राज ने सत्ताधारी सरकार और RSS पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग धीरे-धीरे देश में संविधान को हटाकर मनुस्मृति के पुराने और भेदभावपूर्ण सिद्धांतों को लागू करने की साजिश रच रहे हैं। कांग्रेस और अन्य दलित संगठनों का स्पष्ट मानना है कि हल्द्वानी की शुद्धिकरण वाली रस्म एक प्रमुख दलित नेता का जातिवादी अपमान है। राहुल गांधी द्वारा इस घटना की तीखी आलोचना किए जाने और उसके बाद उन पर एफआईआर दर्ज होने के बाद से यह पूरा मामला अब और अधिक गरमा गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप