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एक घंटा पहले
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विचारों
उत्तर प्रदेश में सरकार और विधायकों को लेकर जनता की राय
उत्तर प्रदेश के हालिया सर्वे के अनुसार, राज्य सरकार के कामकाज को लेकर जनता की संतुष्टि का स्तर काफी हद तक सकारात्मक रहा है। सर्वे में शामिल 52 फीसदी लोगों ने राज्य सरकार के प्रदर्शन पर संतोष जताया है, जिसमें पूर्णतः संतुष्ट, संतुष्ट और औसत रूप से संतुष्ट लोग शामिल हैं। इसके विपरीत, स्थानीय विधायकों के काम से संतुष्ट होने वाले लोगों का आंकड़ा करीब 44 फीसदी रहा। आम जनता के बीच मुख्य समस्याओं की बात करें, तो बेरोजगारी इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई का स्थान आता है, जो आम आदमी की प्राथमिक चिंताओं में शामिल हैं।
मतदान के लिए प्राथमिकताएं और पार्टी का प्रभाव
सर्वे में वोटिंग के व्यवहार को समझने के लिए पूछे गए सवाल पर 25 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि वे वोट डालते समय पार्टी की विचारधारा को सबसे अधिक महत्व देते हैं। वहीं 22 फीसदी लोगों के लिए विकास और जनहित के मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण रहे। मुख्यमंत्री के चेहरे को आधार मानकर वोट करने वाले मतदाताओं की संख्या 13.5 फीसदी रही। यह भी गौर करने वाली बात है कि 64 फीसदी मतदाता अपना मन बना चुके हैं, जबकि करीब 36 फीसदी लोग अभी भी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं या अपनी राय स्पष्ट करने से बच रहे हैं।
सीएम पद की पसंद और गठबंधन का समीकरण
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में योगी आदित्यनाथ को 43.4 फीसदी लोगों ने पसंद किया, जबकि अखिलेश यादव को 35.5 फीसदी लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ। अगर पार्टी या गठबंधन के स्तर पर बात करें, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 41.8 फीसदी और समाजवादी पार्टी (SP) को 38.7 फीसदी समर्थन मिलता दिख रहा है। दोनों के बीच इस समय 3 फीसदी का अंतर है। कार्यक्रम में इस पर भी चर्चा हुई कि 2017 में यह फासला 13 फीसदी और 2022 में 7 फीसदी के करीब था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैकर सर्वे के आंकड़ों से सीधे सीटों का अनुमान लगाना जटिल होता है, क्योंकि सत्ता में रहने वाले चेहरे को हमेशा एक स्वभाविक लाभ मिलता है।
कानून-व्यवस्था और विकास का असर
चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से उठी कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की बढ़त के पीछे कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा की भावना बड़े कारण हैं। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों, नए एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का सीधा असर आने वाले चुनाव पर पड़ने की संभावना है। वहीं, युवा मतदाताओं के रुझान को लेकर भी अलग तस्वीर दिखी, जिसमें 18 से 24 वर्ष के युवाओं के बीच अखिलेश यादव को योगी आदित्यनाथ से अधिक पसंद किए जाने के आंकड़े सामने आए। हालांकि, इस आंकड़े पर कार्यक्रम में मौजूद कुछ विशेषज्ञों ने सर्वे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उत्तराखंड और पंजाब का चुनावी परिदृश्य
अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में सर्वे ने भाजपा को 41 फीसदी और कांग्रेस को 36 फीसदी समर्थन दिया है। यहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को करीब 28 फीसदी लोगों का समर्थन मिला है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने माना कि उत्तराखंड में भाजपा बढ़त बनाए हुए है, लेकिन मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत लोकप्रियता के आंकड़ों पर चर्चा की गई। दूसरी ओर, पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की अप्रूवल रेटिंग 55 फीसदी दर्ज की गई है। यहां पार्टी को 34 फीसदी और कांग्रेस को 30 फीसदी जनसमर्थन मिलने का अनुमान है। भविष्य में भाजपा और अकाली दल के गठबंधन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अंत में, पैनल ने यही निष्कर्ष निकाला कि ये सर्वे केवल एक संकेत हैं और वास्तविक चुनाव परिणाम सीटों, स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर ही तय होंगे।
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