Coffee Par Kurukshetra: सोनिया गांधी से ममता की मुलाकात के बाद INDIA गठबंधन में नई हलचल, जानें पूरा समीकरण भारत एक घंटा पहले 3
एक टीवी परिचर्चा में पैनलिस्टों ने ममता बनर्जी की संभावित रणनीति, INDIA गठबंधन को स्थायी रूप देने की कोशिश और मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की मुश्किलों पर विस्तार से बात की।

INDIA गठबंधन को स्थायी रूप देने की कवायद

परिचर्चा में पैनलिस्टों ने बताया कि ममता बनर्जी की मंशा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनावों तक सिमटकर न रह जाए, बल्कि उसका एक स्थायी ढांचा खड़ा किया जाए। इस दिशा में गठबंधन के लिए एक सचिवालय, अलग-अलग समितियां, एक मीडिया विंग और राज्यों में सक्रिय संगठनात्मक तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई गई। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा सामने आई कि ममता बनर्जी गठबंधन की संयोजक की भूमिका संभालना चाहती हैं।

संयोजक पद की पुरानी बहस एक बार फिर सतह पर

इसी सिलसिले में बीते दिनों की घटनाओं का भी जिक्र हुआ। बताया गया कि INDIA गठबंधन के आरंभिक चरण में जेडीयू नेता नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की चर्चा चली थी, मगर तब वह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। पैनलिस्टों की राय थी कि कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, किसी दूसरे नेता को गठबंधन की कमान सौंपने के पक्ष में नजर नहीं आते।

कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों का पुराना सफर

बातचीत के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के अतीत के संबंधों पर भी रोशनी डाली गई। पैनलिस्टों ने याद दिलाया कि 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ममता बनर्जी का साथ दिया था, परंतु इसके बाद दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। बताया गया कि कांग्रेस के भीतर आज भी यह भावना कायम है कि ममता बनर्जी ने बीते वर्षों में पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया।

क्या राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका की तलाश में हैं ममता?

पैनल में यह भी कहा गया कि मौजूदा हालात में ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अहमियत बरकरार रखने की कोशिश में जुटी हैं। कुछ वक्ताओं का मानना था कि पश्चिम बंगाल में बढ़ती राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर संभावित नाराजगी की वजह से वे राष्ट्रीय स्तर पर नए राजनीतिक समीकरण टटोल रही हैं।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को तगड़ा झटका

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का मसला भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर पैनलिस्टों ने सवाल खड़े किए। बताया गया कि उन पर अपने हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगा था, जिसके चलते रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद भाजपा के तीनों प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

नामांकन रद्द होने से उठे संगठनात्मक सवाल

पैनलिस्टों ने कांग्रेस संगठन की कार्यशैली पर भी अंगुली उठाई। उनका कहना था कि राज्यसभा जैसे अहम चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के दौरान इस तरह की चूक होना पार्टी की गंभीर राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरी की ओर इशारा करती है। चर्चा में यह भी कहा गया कि अगर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के बीच बेहतर तालमेल होता, तो ऐसी नौबत टाली जा सकती थी।

विपक्षी राजनीति के सामने नई चुनौतियां

परिचर्चा का निचोड़ यही निकला कि विपक्षी राजनीति इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक तरफ क्षेत्रीय दल अपनी भूमिका और असर को बनाए रखने में लगे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर नई चुनौतियों से जूझ रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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