अंधेरी रातों में छतों पर बरसते रहस्यमय पत्थर, पुलिस और युवाओं का पहरा भी साबित हुआ नाकाम राष्ट्रीय राजनीति 9 घंटे पहले 6
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक गांव में रात होते ही छतों पर पत्थरों की बारिश हो रही है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। प्रशासन की तैनाती और स्थानीय युवाओं की मुस्तैदी के बावजूद यह पहेली सुलझने का नाम नहीं ले रही है।

अनंतपुर में फैली रहस्यमय दहशत

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के अप्पाजीपेटा गांव में आजकल एक अजीबोगरीब और खौफनाक स्थिति बनी हुई है। जैसे ही सूरज ढलता है और रात का अंधेरा घिरता है, गांव के घरों की छतों पर पत्थरों के गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस रहस्यमय घटना ने न केवल ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है, बल्कि स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। पत्थरों की इस रहस्यमय बारिश के कारण लोग अपनी ही सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और डर में जीने को मजबूर हैं।

क्या है यह खौफनाक खेल

इस घटनाक्रम का सबसे डरावना पहलू यह है कि पत्थर फेंकने वाला शख्स किसी की भी नजर में नहीं आ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि यह पत्थरबाजी रात के 10 बजे से शुरू होती है। जब पत्थर छतों पर गिरते हैं, तो आवाज से ही ग्रामीणों की रूह कांप जाती है। गांव के अधिकांश घरों की छतें एस्बेस्टस की बनी हुई हैं, जिस कारण पत्थरों की चोट से छतें टूट रही हैं। कई ग्रामीणों को इन पत्थरों की चपेट में आने से मामूली चोटें भी आई हैं। लगातार हो रही इस हरकत ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, और लोग सूर्यास्त होते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं।

सुरक्षा के सारे दावे फेल

ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने गांव में 4 कॉन्स्टेबल्स को तैनात किया है, जो सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे हैं। वहीं, गांव के करीब 20 युवा भी लगातार रात भर जागकर पहरा दे रहे हैं। इन युवाओं के हाथों में टॉर्च और डंडे होते हैं, जो गांव की गलियों और पास की पहाड़ियों की छानबीन करते हैं। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि पुलिस और युवाओं की मौजूदगी के बावजूद, उनकी आंखों के ठीक सामने पत्थर बरसते रहते हैं और उन्हें पत्थर फेंकने वाला कोई इंसान या कोई परछाई तक दिखाई नहीं देती।

अलौकिक शक्तियों की चर्चा

लगातार बढ़ते इस डर के बीच अब ग्रामीण इसे किसी सामान्य शरारत नहीं, बल्कि अलौकिक गतिविधियों से जोड़कर देख रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि इसके पीछे कोई भूतिया साया या अदृश्य ताकत है। वैज्ञानिक या तार्किक दृष्टिकोण से देखें तो कोई भी अभी तक इस गुत्थी को सुलझाने में नाकाम रहा है। हालांकि, ऐसी घटनाएं अतीत में तमिलनाडु के तिरुप्पुर और देश के कुछ अन्य इलाकों में भी दर्ज की जा चुकी हैं, लेकिन उन मामलों में भी जांचकर्ता किसी ठोस नतीजे तक पहुंचने में असफल रहे हैं।

क्या यह सिर्फ एक शरारत है

सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह किसी की सोची-समझी साजिश है या फिर वाकई कोई ऐसी चीज है जिसे अभी तक समझा नहीं जा सका है? पुलिस अपनी तरफ से जांच कर रही है, लेकिन अब तक कोई भी संदिग्ध व्यक्ति पकड़ में नहीं आया है। गांव के लोग एक ऐसी अनसुलझी पहेली के बीच फंसे हैं, जहां न तो पुलिस की खाकी वर्दी और न ही गांव के युवाओं का साहस उन्हें इस खौफ से मुक्त कर पा रहा है। रात के 10 बजते ही शुरू होने वाला यह सिलसिला हर गुजरती रात के साथ और अधिक गंभीर होता जा रहा है।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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