राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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विचारों
विधानसभा में पहली बार गूंजी सीएम विजय की आवाज
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन और उदयनिधि स्टालिन के बीच उपजे विवाद पर आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सोमवार को राज्य विधानसभा के सत्र के दौरान उन्होंने पहली बार इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को भी महिलाओं को नीचा दिखाने या उनका अपमान करने की अनुमति मिल जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति असभ्य व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर ऐसा होता है तो कानून अपना काम करने में पीछे नहीं हटेगा।
महिलाओं के सम्मान पर सख्त रुख
विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि राजनीतिक गलियारों में बहस और टिप्पणियां स्वाभाविक हैं, लेकिन उनमें शालीनता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, “राजनीतिक नेता राजनीतिक टिप्पणी करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन महिलाओं के प्रति अपमानजनक या दोहरे अर्थ वाली बातें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं।” उन्होंने आगे जोड़ा कि समाज में महिलाएं—चाहे वे माताएं हों, बहनें हों या बेटियां—हर जगह विद्यमान हैं और उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी को सलाह देने नहीं आए हैं, बल्कि वे एक कड़वी सच्चाई बयां कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को याद करते हुए कहा कि विधानसभा के भीतर उन्होंने किस तरह के अपमान का सामना किया, यह इतिहास का एक काला अध्याय है जिसे दोहराया नहीं जाना चाहिए।
क्या है पूरा तृषा कृष्णन विवाद
यह पूरा घटनाक्रम पिछले महीने तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम से जुड़ा है। वहां डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक भाषण के दौरान टिप्पणी की थी, जिसके बाद भीड़ से अभिनेत्री तृषा का नाम पुकारा गया। उदयनिधि ने उस पर जो कथित प्रतिक्रिया दी, उसे कई लोगों ने अपमानजनक और द्विअर्थी माना। हालांकि, उदयनिधि का कहना है कि वे कावेरी के पानी को लेकर बात कर रहे थे और उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया। इसके बाद टीवीके की महिला शाखा ने तंजावुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उदयनिधि को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। उदयनिधि ने इस कार्रवाई को महज एक कॉमेडी करार दिया है और दावा किया है कि वे इस कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक मर्यादा और डीएमके पर आरोप
मुख्यमंत्री विजय ने इस मुद्दे के बहाने तमिलनाडु की वर्तमान राजनीति में आ रही गिरावट पर भी चिंता जताई। उन्होंने डीएमके के एक वरिष्ठ नेता के उस विवादास्पद बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि जो लोग डीएमके को वोट नहीं देंगे, वे शांति से नहीं मरेंगे। विजय ने इन शब्दों की कड़ी आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान होना चाहिए, न कि धमकी की राजनीति होनी चाहिए।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के मुद्दे
विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय ने डीएमके पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़ते हुए अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़ी फाइलों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि डीएमके के शासन में पार्टी फंड के नाम पर 7.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर एमके स्टालिन और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “जहां भी डीएमके है, वहां गलत काम होते हैं और जहां गलत काम होते हैं, वहां डीएमके जरूर मौजूद होती है।”
मुख्यमंत्री ने टीएएसएमएसी से जुड़े घोटालों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कऱूर क्षेत्र के रसूखदार लोग हर शराब की बोतल पर 10 रुपये की रिश्वत वसूलते थे। पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई का नाम लेते हुए विजय ने पूछा कि क्या जनता को और सबूतों की आवश्यकता है। उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार केवल जन कल्याण पर केंद्रित है और यह तमिलनाडु के आठ करोड़ लोगों की सरकार है, न कि किसी एक परिवार या पहचान की।
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