राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर भड़के सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए नोटिस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान अधिकारी की इस हरकत पर तीखी नाराजगी जाहिर की। मामला उस छात्र से जुड़ा है जिसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के अंतर्गत नोटिस थमाया गया था। यह छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के बैनर तले हुए प्रदर्शन में शामिल हुआ था।
सीजेआई ने पूछा- ऐसी हिम्मत कैसे हुई?
जब एक वकील ने इस नोटिस का मामला अदालत के संज्ञान में लाया, तो सीजेआई सूर्यकांत बेहद सख्त नजर आए। उन्होंने सीधे सवाल करते हुए कहा कि आखिर एक मजिस्ट्रेट की ऐसी हिम्मत कैसे हो गई कि वह इस तरह का नोटिस जारी करे। मुख्य न्यायाधीश ने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही छात्रों के खिलाफ होने वाले दंडात्मक कदमों और जबरन की जाने वाली कार्रवाई पर स्पष्ट रूप से रोक लगा रखी है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश
अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है। ज्ञात हो कि पूर्व में कोर्ट ने CJP विरोध प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर को रद्द करते हुए भविष्य में किसी भी छात्र के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। कोर्ट की इस सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई का आधार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा प्रकरण जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से उपजा है। सीजेआई ने अपनी टिप्पणी में यह सुनिश्चित किया कि कानून का शासन सर्वोपरि है और अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इस घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेष रूप से उन मामलों में जहां अदालत पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी हो। फिलहाल, इस नोटिस को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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