भारत
45 मिनट पहले
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विचारों
देश की औद्योगिक सुरक्षा में एक नए युग की शुरुआत
आज के दौर में सुरक्षा के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं। युद्ध अब केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि दुश्मन देश की अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए साइबर हमलों और तकनीकी तोड़फोड़ का सहारा ले रहे हैं। हमारे देश के पावर ग्रिड, ऑयल रिफाइनरी, बंदरगाह और अन्य औद्योगिक केंद्रों को सुरक्षित रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इन उभरते खतरों से निपटने और विकसित भारत के सपनों को सुरक्षित रखने के लिए सीआईएसएफ ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद, 1 नवंबर 2026 से बल ने अपनी पुरानी भौगोलिक क्षेत्र आधारित कमांड प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और इसके स्थान पर अत्यधिक आधुनिक और तकनीकी रूप से दक्ष फंक्शनल सेक्टर प्रणाली लागू की है।
नई प्रणाली की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पुरानी व्यवस्था में सीआईएसएफ के सेक्टर मुख्यालय का दायरा बहुत अधिक फैला हुआ था। एक ही सेक्टर मुख्यालय के अंतर्गत 50 से अधिक अलग-अलग तरह के प्रतिष्ठान आते थे। स्थिति यह थी कि एक ही अधिकारी को कोयला खदानों, बिजली संयंत्रों और बंदरगाहों जैसे बिल्कुल भिन्न स्वरूप वाले स्थानों की सुरक्षा देखनी पड़ती थी। हालांकि, एक कोयला खदान की सुरक्षा और एक हाई-टेक बंदरगाह की सुरक्षा में जमीन-आसमान का अंतर है। बंदरगाहों पर ड्रोन हमले, ओटी यानी ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी और साइबर-फिजिकल सिस्टम को हैक करने जैसे खतरे अधिक होते हैं। इन आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अब ऐसा नेतृत्व चाहिए जो संबंधित उद्योग की तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझता हो। इसीलिए अब सेक्टर का विभाजन स्थान के आधार पर नहीं बल्कि काम के स्वरूप यानी फंक्शन के आधार पर किया गया है।
देशभर में लागू नई फंक्शनल कमांड संरचना
इस नई कार्यप्रणाली के तहत अब पूरे देश के प्रतिष्ठानों को निम्नलिखित छह प्रमुख सेक्टरों में विभाजित किया गया है जो आज से ही प्रभावी हो गए हैं:
- पावर सेक्टर: इसके लिए पावर-I नई दिल्ली और पावर-II कोलकाता में कार्य करेंगे।
- कोल सेक्टर: इसके लिए रांची को मुख्य केंद्र बनाया गया है।
- स्टील सेक्टर: इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की निगरानी भिलाई से होगी।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर: इसका मुख्यालय गुवाहाटी में होगा।
- पोर्ट सेक्टर: समुद्री सीमाओं और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए वेस्ट कोस्ट मुंबई और ईस्ट कोस्ट चेन्नई में कमांड तैनात होंगी।
- जीबीएमएम और एमआरटीएस सेक्टर: इसमें सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और मेट्रो सेवाएं शामिल हैं, जिनका नेतृत्व नई दिल्ली से होगा।
यह मॉडल अचानक नहीं अपनाया गया है। इससे पहले विमानन क्षेत्र में 2001 से और परमाणु व अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों में 2018 से इसी प्रकार का फंक्शनल मॉडल शानदार प्रदर्शन कर रहा है। अब पूरी फोर्स को इसी सफल ढांचे में ढाला गया है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और कार्यप्रणाली
क्या इस बड़े संगठनात्मक बदलाव का असर आम लोगों या कर्मचारियों पर पड़ेगा? सीआईएसएफ ने स्पष्ट किया है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था, रोजाना की चेकिंग, पेट्रोलिंग और क्विक रिएक्शन टीम यानी क्यूआरटी की तैनाती पहले की तरह ही जारी रहेगी। बदलाव केवल वरिष्ठ स्तर पर सुपरविजन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में हुआ है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को अपने खास सेक्टर के लिए इमरजेंसी प्लान या कंटिंजेंसी प्लान बनाने में आसानी होगी।
नेतृत्व का दृष्टिकोण
इस ऐतिहासिक कदम पर बल के महानिदेशक ने कहा कि यह नई व्यवस्था एक गेम-चेंजर साबित होगी। इससे प्रतिष्ठान प्रबंधन और बल के बीच संवाद बेहतर होगा और एक ही सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट होने से समस्याओं का समाधान तुरंत हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सीआईएसएफ को केवल एक गार्डिंग फोर्स से ऊपर उठाकर एक इंटेलिजेंस-लेड और तकनीकी रूप से उन्नत बल के रूप में स्थापित करेगा। गौरतलब है कि हाल ही में सीआईएसएफ ने मुंबई हवाई अड्डे पर 1.83 करोड़ रुपये के तीन अंडाकार पदार्थ बरामद किए थे, जो बल की चौकसी का प्रमाण है। अब आधुनिक काउंटर-ड्रोन रणनीति और साइबर सुरक्षा के साथ सीआईएसएफ भारत के विकास को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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