उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर धर्म नगरी चित्रकूट पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति में डूबी नजर आई. देर रात से ही लाखों भक्त कामतानाथ स्वामी के दर्शन, मंदाकिनी में स्नान और पूजा-पाठ के लिए यहां पहुंच गए. भीषण गर्मी की परवाह किए बिना रामघाट और परिक्रमा मार्ग पर आस्था का ऐसा सैलाब दिखाई दिया कि प्रशासन को सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक प्रबंध करने पड़े.
रात से ही घाटों पर डटे रहे श्रद्धालु
चित्रकूट में सोमवती अमावस्या पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. देर रात से ही लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजन की चाह में पहुंचकर घाटों के पास डेरा डाले हुए थे. सुबह 4 बजे से ही भक्तों ने पवित्र स्नान कर दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू कर दिया.
क्यों खास है चित्रकूट में सोमवती अमावस्या
चित्रकूट में सोमवती अमावस्या का अलग ही महत्व माना जाता है. मान्यता है कि अमावस्या के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे. तभी से हर वर्ष अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं.
दूर-दूर से पहुंचे भक्त
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि कड़ी धूप और भीषण गर्मी के बावजूद चित्रकूट में आस्था का अद्भुत संगम बना रहा. बांदा, कानपुर, प्रयागराज, दिल्ली और मध्य प्रदेश समेत कई इलाकों से प्रभु कामतानाथ स्वामी के भक्त आशीर्वाद पाने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचे.
कामतानाथ मंदिर में लगीं लंबी कतारें
कामतानाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालु लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर प्रभु श्री के स्वरूप में विराजमान कामतानाथ स्वामी के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखे.
मत गजेंद्र नाथ मंदिर में जलाभिषेक
रामघाट स्थित मत गजेंद्र नाथ मंदिर में सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भी श्रद्धालु लंबी कतारों में लगे रहे. मान्यता है कि ये वही राजा हैं, जिनसे अनुमति लेकर प्रभु श्रीराम ने चित्रकूट में अपने वनवास का समय बिताया था.
मां मंदाकिनी में आस्था की डुबकी
रामघाट पर मां मंदाकिनी नदी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु रात से ही घाटों पर मौजूद रहे. भक्त बारी-बारी से नदी में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर रहे हैं.
गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था की है. रामघाट और परिक्रमा मार्ग पर धूप से राहत के लिए जगह-जगह टेंट लगाए गए हैं और रास्तों पर मैट बिछाई गई हैं.
पांच जोन और 15 सेक्टर में बंटा क्षेत्र
पूरे मेले के लिए क्षेत्र को पांच जोन और 15 सेक्टर में बांटा गया है. सुरक्षा व्यवस्था के तहत आठ पुलिस क्षेत्राधिकारी, 16 प्रभारी निरीक्षक व थानाध्यक्ष, 28 निरीक्षक, 132 उपनिरीक्षक, 450 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल, 85 महिला कांस्टेबल, यातायात और एलआईयू की विशेष टीमें, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता, एसडीआरएफ टीम, पीएसी और फ्लड कंपनी की प्लाटून तैनात की गई हैं.
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