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एक घंटा पहले
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और कूटनीतिक रहस्य
भारत की राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। सम्मेलन शुरू होने में अब 48 घंटे से भी कम का वक्त बचा है, लेकिन इस बड़े आयोजन को लेकर एक बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है। दुनिया की निगाहें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर टिकी हैं। फिलहाल, उनके आने को लेकर कूटनीतिक गलियारों में रहस्य गहराता जा रहा है। भारत और चीन, दोनों ही देशों के विदेश मंत्रालयों की ओर से अभी तक इस यात्रा को लेकर कोई भी आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है।
चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख
चीनी राष्ट्रपति के भारत आगमन को लेकर चल रही अटकलों के बीच, चीन सरकार ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीते 8 सितंबर को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि बीजिंग ब्रिक्स (BRICS) सहयोग को अत्यंत महत्व देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन इस साल शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए भारत के प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। हालांकि, जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा, तो उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। माओ निंग ने केवल इतना कहा कि यदि उनके पास कोई अपडेट होगा, तो वे समय रहते जानकारी साझा करेंगे। उन्होंने पत्रकारों को इंतजार करने की सलाह दी है।
चीन की कार्यशैली और कूटनीतिक गोपनीयता
चीन के राष्ट्राध्यक्ष की विदेश यात्राओं को लेकर अपनाई जाने वाली गोपनीयता कोई नई बात नहीं है। पश्चिमी देशों की सरकारों के विपरीत, जो अक्सर अपने शीर्ष नेताओं के दौरे के कार्यक्रम हफ्तों पहले सार्वजनिक कर देती हैं, चीन का विदेश मंत्रालय इस मामले में अत्यंत सावधानी बरतता है। कई बार ऐसी स्थिति देखने में आती है कि चीनी विदेश मंत्रालय अपनी यात्रा शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले ही पुष्टि करता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि नेता के गंतव्य पर पहुंचने के बाद ही सरकारी मीडिया के माध्यम से यात्रा की जानकारी दी जाती है। यह कार्यप्रणाली चीन के भीतर होने वाली घरेलू यात्राओं या आंतरिक गतिविधियों के दौरान भी देखी जाती है, जहां पूरी पारदर्शिता का अभाव रहता है।
शिखर सम्मेलन और अन्य वैश्विक नेताओं का आगमन
ब्रिक्स का यह महामंथन 12 और 13 सितंबर को आयोजित होना है। वैश्विक स्तर की विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में भाग लेने की पूरी उम्मीद है। यदि वे भारत आते हैं, तो यह बीते 7 वर्षों में उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। राजधानी दिल्ली वर्तमान में कई वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। खबरों की मानें तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचने की संभावना है। वहीं, चीनी राष्ट्रपति के 12 सितंबर को राजधानी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इन तमाम संभावनाओं के बावजूद, चीन के आधिकारिक बयानों में अंतिम क्षण तक स्पष्टता का न होना वैश्विक कूटनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या अगले कुछ घंटों में बीजिंग की ओर से आधिकारिक मुहर लगती है या यह सस्पेंस सम्मेलन के शुरू होने तक बरकरार रहता है।
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