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एक घंटा पहले
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साउथ चाइना सी में बदलता समीकरण
दुनिया भर में बढ़ते सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, दक्षिण चीन सागर में एक खामोश लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। इस घटनाक्रम ने चीन की बेचैनी बढ़ा दी है। हाल ही में फिलीपींस में अमेरिका के रक्षा नीति विशेषज्ञ एल्ब्रिज कोल्बी ने एक रणनीतिक भाषण दिया। इस भाषण का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये और उसके एकाधिकार को रोकने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों की भावी योजना को रेखांकित करना था। हालांकि, इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस कूटनीतिक और सैन्य चाल की चाबी असल में भारत के पास है।
बालिकातन सैन्य अभ्यास और भारत की भूमिका
फिलीपींस के मरीन सैनिकों ने हाल ही में अमेरिका के साथ मिलकर बालिकातन नाम से एक व्यापक सैन्य अभ्यास का आयोजन किया। इस अभ्यास के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा। फिलीपींस की सेना ने भारत में निर्मित मारक ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली का सिमुलेशन परीक्षण किया। यद्यपि भारत इस ड्रिल में सीधे तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन एक ऑब्जर्वर की हैसियत से उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिण चीन सागर में भारत की सक्रियता अब गेम-चेंजर साबित हो रही है। अमेरिकी और फिलीपींस के संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारतीय मिसाइल सिस्टम का उपयोग इस बात का पुख्ता सबूत है कि भारत ने अब चीन के सामने सुरक्षा की एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है।
भारत का साइलेंट गेम और चीन की घबराहट
भारत ने एक ऐसी शांत कूटनीति अपनाई है जिसे विशेषज्ञों ने साइलेंट गेम का नाम दिया है। भारत को दक्षिण चीन सागर में अपने सैनिक उतारने की जरूरत नहीं पड़ी, फिर भी उसने चीन को करारा झटका दिया है। फिलीपींस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराकर, संवेदनशील खुफिया जानकारियां साझा करके और मजबूत कूटनीतिक समर्थन देकर भारत ने चीन के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इसे केवल कूटनीति का मेल नहीं, बल्कि रणनीतिक अभिसरण कहा जा सकता है। भारत अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी को धार देने के साथ ही अपने रक्षा निर्यात को बढ़ावा दे रहा है और चीन को उसके पड़ोस में ही घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत के इन कदमों का अप्रत्यक्ष लाभ अमेरिका को भी मिल रहा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को खत्म करने का प्रयास कर रहा है।
अमेरिका की डिनायल स्ट्रैटेजी और फिलीपींस की तैयारी
दक्षिण चीन सागर की फर्स्ट आइलैंड चेन पर अमेरिका की नीति डिनायल स्ट्रैटेजी यानी निषेध रणनीति पर आधारित है। इसका अर्थ है कि चीन के खिलाफ सुरक्षा की ऐसी मजबूत घेराबंदी करना कि यदि बीजिंग किसी भी पड़ोसी देश की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश करे, तो उसे भारी सैन्य और आर्थिक लागत चुकानी पड़े। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि सहयोगी देश अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं को सक्षम बनाएं। मनीला में एल्ब्रिज कोल्बी ने स्पष्ट किया था कि चीन का मुकाबला केवल अमेरिकी ताकत से नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए स्थानीय साझेदार देशों का सैन्य रूप से आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है। फिलीपींस ने इस चुनौती को स्वीकार किया है और अपना रक्षा बजट बढ़ाकर 6.7 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
भारत के तीन ब्रह्मास्त्र जो बदल रहे हैं समंदर का खेल
भारत ने अपनी तकनीकी और सामरिक शक्ति के दम पर इस पूरे क्षेत्र में संतुलन बदल दिया है। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं:
- घातक मिलिट्री हार्डवेयर: साल 2022 में भारत और फिलीपींस के बीच 375 मिलियन डॉलर का ऐतिहासिक रक्षा समझौता हुआ। इसके तहत भारत ने उन्हें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें सौंपी हैं। 290 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइलें फिलीपींस के पश्चिमी लुजोन क्षेत्र में तैनात हैं, जहां से वे स्कारबोरो शोआल तक आसानी से निशाना साध सकती हैं। इसके अलावा 400 किलोमीटर रेंज वाली उन्नत मिसाइलें, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और तेजस फाइटर जेट्स को लेकर भी चर्चा जारी है।
- खुफिया और समुद्री निगरानी: भारत ने फिलीपींस को अपने आईएफसी-आईओआर नेटवर्क से जोड़ा है। हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक समुद्री गतिविधियों की पल-पल की जानकारी साझा की जा रही है। पिछले साल दोनों देशों के युद्धपोतों ने संयुक्त गश्त की थी, जिसे विफल करने के लिए चीनी जहाजों ने काफी कोशिश की थी, लेकिन वे कोई हरकत नहीं कर पाए।
- कानूनी और कूटनीतिक समर्थन: भारत ने 2016 के उस अंतरराष्ट्रीय फैसले का खुले तौर पर समर्थन किया है, जिसने दक्षिण चीन सागर पर चीन के फर्जी 9-डैश लाइन के दावे को खारिज कर दिया था।
भारत की स्वतंत्र नीति अमेरिका के लिए वरदान
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता है। भारत किसी भी देश के साथ औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन यही निष्पक्ष छवि उसे अधिक विश्वसनीय बनाती है। यदि अमेरिका या कोई अन्य पश्चिमी देश फिलीपींस को सीधे तौर पर हथियार देता, तो चीन पूरी दुनिया में यह प्रचार करता कि क्षेत्र में अस्थिरता फैलाई जा रही है। लेकिन जब भारत जैसा एक स्वतंत्र देश फिलीपींस को ब्रह्मोस जैसी मारक मिसाइलें देता है, तो चीन के पास दुष्प्रचार करने का कोई ठोस आधार नहीं बचता। भारत अपने राष्ट्रीय हितों के लिए आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका परिणाम यह हो रहा है कि दक्षिण चीन सागर में किसी एक देश की दादागीरी खत्म हो रही है, जो कि अमेरिका का भी मुख्य लक्ष्य है।
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