किडनी फेल होने पर 13 साल तक प्रेशर कुकर से डायलिसिस करता रहा गरीब शख्स, हैरान रह गया पूरा चीन विश्व एक घंटा पहले 1
चीन के हू सोंगवेन की दोनों किडनियां फेल हो गईं और अस्पताल के महंगे इलाज ने परिवार को कंगाल कर दिया, तो उन्होंने रसोई के प्रेशर कुकर, बर्तनों और कुछ मेडिकल पुर्जों से घर पर ही डायलिसिस मशीन बना डाली और 13 साल तक खुद को जिंदा रखा।

चीन से सामने आया एक मामला दुनिया भर के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। एक गरीब चीनी नागरिक की जब दोनों किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर गईं और अस्पताल का खर्च उठाते-उठाते उसका परिवार सड़क पर आ गया, तो उसने हार मानने के बजाय एक अनोखा रास्ता निकाला। इस शख्स ने अपने घर की रसोई में रखे प्रेशर कुकर, कुछ बर्तनों और मेडिकल पार्ट्स की मदद से खुद की 'डायलिसिस मशीन' तैयार कर ली। जिस व्यक्ति को डॉक्टरों ने 'पागल' तक कह दिया था, वही इसी देसी जुगाड़ वाली मशीन के सहारे 13 साल तक न केवल जिंदा रहा, बल्कि उसने मेडिकल साइंस के सख्त नियमों को भी चुनौती दे दी।

पढ़ाई के बीच ही फेल हो गईं दोनों किडनियां

यह कहानी चीन के रहने वाले हू सोंगवेन की है। साल 1993 में हू नानजिंग शहर में एक मौसम वैज्ञानिक बनने के सपने के साथ कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। उनके परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उनकी पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए थे, लेकिन तभी किस्मत ने ऐसी करवट ली कि सब कुछ बिखर गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि हू सोंगवेन को रीनल फेलियर है, यानी उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। एक झटके में उनका करियर, उनके सपने और पूरी जिंदगी पटरी से उतर गई। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि जिंदा रहना है तो कुछ ही दिनों में अस्पताल आकर जीवनभर डायलिसिस कराना होगा, और इसका खर्च किसी आम इंसान के बस की बात नहीं था।

इलाज के खर्च ने तोड़ दी परिवार की कमर

किडनी फेल होने के बाद हू सोंगवेन अगले छह साल तक लगातार अस्पताल के चक्कर काटते रहे। हर दो-तीन दिन में उन्हें खून साफ कराने जाना पड़ता था, लेकिन उस दौर में चीन में यह इलाज बेहद महंगा था। हर एक डायलिसिस विजिट के लिए हू को करीब 50 पाउंड यानी लगभग 5,000 रुपये से ज्यादा चुकाने पड़ते थे।

हफ्ते में दो से तीन बार होने वाले इस खर्च ने परिवार को आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया। छह साल के भीतर ही परिवार की जिंदगी भर की कमाई, बचत और यहां तक कि जमीन-जायदाद भी इलाज की भेंट चढ़ गई। हालत यह हो गई कि आगे के इलाज के लिए पैसे जुटाना नामुमकिन हो गया। इसका सीधा मतलब था—पैसा खत्म तो जिंदगी खत्म।

रसोई के सामान से बना डाली डायलिसिस मशीन

साल 1999 आते-आते हू सोंगवेन के पास अस्पताल जाने तक के पैसे नहीं बचे थे, मगर वे इतनी आसानी से मौत के आगे झुकने वाले नहीं थे। उन्होंने ठान लिया कि अगर अस्पताल उन्हें नहीं बचा सकता, तो वे खुद अपनी जान बचाएंगे। हू ने मेडिकल की एक पुरानी किताब उठाई और डायलिसिस के बुनियादी सिद्धांतों को गहराई से समझना शुरू कर दिया।

इसके बाद उन्होंने रसोई के बर्तनों, प्रेशर कुकर, कुछ मेडिकल ट्यूब्स और केमिकल्स की मदद से अपने घर के एक छोटे से कमरे में ही डायलिसिस मशीन असेंबल कर ली। इसके बाद वे दुनिया भर में मशहूर हो गए और कई जगहों से उनके पास इंटरव्यू के लिए कॉल आने लगे।

अपनी जुबानी सुनाई पूरी दास्तान

चीनी मीडिया 'सॉदर्न वीकली' को दिए एक इंटरव्यू में हू ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि 'अगर आपके पास हाई स्कूल की डिग्री है, आप डायलिसिस के काम करने के तरीके को समझते हैं, मशीन चलाने के निर्देशों का सही से पालन करते हैं और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहते हैं, तो कुछ भी गलत नहीं हो सकता।'

हू सोंगवेन के मुताबिक, पूरी मशीन बनाने में उनका सबसे बड़ा खर्च एक ब्लड पंप खरीदने में हुआ। पहले उन्होंने खुद ब्लड पंप बनाने की कोशिश की, लेकिन जब इसमें कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने करीब 500 पाउंड यानी लगभग 50,000 रुपये खर्च करके एक मेडिकल ब्लड पंप खरीदा। अस्पताल में जहां एक बार के इलाज पर 50 पाउंड का खर्च आता था, वहीं हू के इस देसी जुगाड़ के बाद हर ट्रीटमेंट का खर्च घटकर सिर्फ 6 पाउंड यानी करीब 600 रुपये रह गया। इस रकम में केवल जरूरी केमिकल्स और रिप्लेसमेंट फिल्टर का पैसा शामिल था।

हू ने बताया कि इस मशीन का सबसे अहम हिस्सा 'फिल्टर' है। एक नया फिल्टर 10 पाउंड का आता है, लेकिन वे अपने देसी तरीके से उसे साफ करके एक ही फिल्टर को 8 बार इस्तेमाल कर लेते थे। इस पूरे काम में उनकी 81 साल की बुजुर्ग मां ही उनकी असिस्टेंट और डॉक्टर की भूमिका निभाती रहीं।

चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

हू सोंगवेन की यह कहानी जैसे ही एक वीडियो के जरिए चीन के सोशल मीडिया पर वायरल हुई, पूरे देश में हलचल मच गई। लोग हैरान थे कि कोई व्यक्ति बिना किसी मेडिकल डिग्री के, घरेलू सामानों से खुद को 13 साल तक कैसे जिंदा रख सकता है। इस कहानी ने चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद कड़वी और डरावनी हकीकत भी दुनिया के सामने ला दी।

साल 2008 की एक रिसर्च के अनुसार, चीन में डायलिसिस का खर्च इतना ज्यादा था कि किडनी की बीमारी से जूझ रहे कुल मरीजों में से सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही नियमित रूप से अस्पताल का खर्च उठा पाते थे। बाकी 90 प्रतिशत गरीब मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे। हू की मजबूरी ने चीन के इसी काले सच को बेनकाब कर दिया।

डॉक्टरों ने जताया था इन्फेक्शन का खतरा

जब हू ने स्थानीय डॉक्टरों को अपनी इस देसी मशीन के बारे में बताया और दिखाया कि वे 13 साल से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो डॉक्टर हैरान रह गए। इन्हीं डॉक्टरों ने पहले हू को चेतावनी दी थी कि 'तुम पूरी तरह पागल हो, यह बेहद खतरनाक है और इससे पल भर में इन्फेक्शन होकर तुम्हारी जान जा सकती थी।'

हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद हू की किस्मत बदल गई। चीनी सरकार को जब इसकी जानकारी मिली, तो उसने हू को एक नई सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम में शामिल कर लिया। इस नई योजना के बाद अब हू सोंगवेन अस्पताल जाकर भी लगभग उतने ही पैसों में सही इलाज करा सकते हैं, जितने उनकी घरेलू मशीन में लगते थे। लेकिन हू का कहना है कि उनके घर से सबसे नजदीकी अस्पताल काफी दूर है, इसलिए आज भी उनका यह देसी जुगाड़ उनके बहुत काम आता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!