धरती को चीरकर चीन बना रहा दुनिया का सबसे बड़ा शिप लॉक, खर्च कई देशों की जीडीपी से भी ज्यादा विश्व 5 घंटे पहले 3
चीन ने यांग्त्जी नदी पर करीब 11.4 अरब डॉलर की लागत वाला विशाल वॉटर वे प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत बनने वाला शिप लॉक दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड शिप लॉक माना जा रहा है। यह चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की पहली बड़ी राष्ट्रीय परियोजना है।

चीन ने एक बार फिर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता दुनिया के सामने रखते हुए करीब 11.4 अरब डॉलर की लागत वाला एक विशाल वॉटर वे प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। इस परियोजना के तहत जो शिप लॉक बनाया जाएगा, उसे दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड शिप लॉक माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत आरंभ किया गया है और इसी योजना की पहली बड़ी राष्ट्रीय परियोजना भी है।

दो हिस्सों में बंटा है यह जलमार्ग प्रोजेक्ट

इस वॉटर वे प्रोजेक्ट में दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं। पहले हिस्से के तहत थ्री गोर्जेस बांध पर मौजूद डबल-लाइन शिप लॉक के उत्तरी ओर एक नया जलमार्ग तैयार किया जाना है। इसमें अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम पहुंच चैनल के साथ-साथ एक डबल-लाइन, पांच-चरण वाली शिप लॉक प्रणाली रहेगी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 6680 मीटर बताई जा रही है।

नई योजना के अनुसार थ्री गोर्जेस बांध के पास पहले से मौजूद शिप लॉक के समानांतर एक जलमार्ग बनाया जाएगा। इसमें दोहरी लाइन वाला पांच चरणों का बड़ा शिप लॉक सिस्टम होगा, जिसकी कुल लंबाई करीब 6.7 किलोमीटर रहेगी। इसके माध्यम से 10 हजार टन तक वजन वाले बड़े जहाज आसानी से आ-जा सकेंगे। प्रत्येक लॉक चैंबर 280 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा होगा।

11 राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ जहाजों की संख्या ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि यांग्त्जी नदी के किनारे बसे 11 राज्यों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। यह इलाका चीन की कुल आबादी और जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तैयार करता है। इतना ही नहीं, देश की टॉप 500 कंपनियों में से लगभग 200 कंपनियां भी इसी इकोनॉमी कॉरिडोर में स्थित हैं।

यांग्त्जी नदी है चीन की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

यह जलमार्ग परियोजना चीन की सबसे बड़ी और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी यांग्त्जी पर बनाई गई है। दरअसल, यांग्त्जी नदी को चीन की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि इसके किनारे देश के कई बड़े औद्योगिक और व्यापारिक शहर बसे हुए हैं।

बीते कुछ वर्षों में यहां माल ढुलाई इतनी तेजी से बढ़ी कि थ्री गोर्जेस बांध का मौजूदा शिप लॉक अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक इस्तेमाल होने लगा। जिस सिस्टम को सालाना 10 करोड़ टन माल संभालने के लिए तैयार किया गया था, उसने यह लक्ष्य तय समय से 19 साल पहले ही पूरा कर लिया। साल 2025 में इस मार्ग से 17.3 करोड़ टन माल की आवाजाही दर्ज की गई।

नया वॉटर वे प्रोजेक्ट क्यों शुरू किया गया

लगातार बढ़ते माल परिवहन के दबाव को देखते हुए चीनी सरकार ने थ्री गोर्जेस न्यू वॉटर वे प्रोजेक्ट को शुरू किया है। इस परियोजना का मकसद नदी के रास्ते होने वाले व्यापार और माल ढुलाई को कई गुना बढ़ाना है।

इस प्रोजेक्ट का दूसरा हिस्सा गेझौबा डैम से जुड़ा हुआ है। यहां पुराने लॉक को हटाकर दो नए और आधुनिक शिप लॉक बनाए जाएंगे। साथ ही नदी तक पहुंचने वाले रास्तों को चौड़ा और गहरा किया जाएगा, ताकि बड़े जहाजों की आवाजाही आसान हो सके।

थ्री गोर्जेस डैम से जुड़े विवाद और चिंताएं

हालांकि थ्री गोर्जेस डैम ने चीन को बिजली उत्पादन और आर्थिक विकास में बड़ा लाभ पहुंचाया है, लेकिन शुरुआत से ही इसे लेकर कई विवाद और आशंकाएं भी जुड़ी रही हैं। इस बांध के निर्माण के चलते 10 लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगहों पर बसना पड़ा। इसके अलावा वॉटर-बॉडी का आकार बढ़ने से कुछ इलाकों में भूस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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