2200 साल पुरानी बीयर का रहस्य: चीन की कब्र में मिला तरल खजाना विश्व 3 घंटे पहले 8
चीन के एक प्राचीन कब्रिस्तान की खुदाई में पुरातत्वविदों को 2200 साल पुरानी बीयर मिली है, जो अब भी तरल अवस्था में है। यह अद्भुत खोज ऐतिहासिक रहस्यों को समझने में मदद कर रही है।

चीन में हुई ऐतिहासिक खोज

पुरातत्व विज्ञान के इतिहास में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने वैज्ञानिकों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। चीन के निंग्शिया हुई स्वायत्त क्षेत्र में स्थित शानजियाबाओ कब्रिस्तान में उत्खनन के दौरान शोधकर्ताओं को करीब 2200 साल पुरानी बीयर मिली है। यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि इतने लंबे समय के बावजूद यह पेय पदार्थ आज भी तरल रूप में मौजूद है, जो अपने आप में एक वैज्ञानिक चमत्कार माना जा रहा है।

खुदाई और कब्र का रहस्य

शोधकर्ता निंग्शिया हुई के शानजियाबाओ कब्रिस्तान में खुदाई का काम कर रहे थे, जहाँ उन्हें 'युद्धरत राज्यों' के दौर यानी लगभग 475 से 221 ईसा पूर्व के काल की 183 कब्रें प्राप्त हुईं। इन्हीं कब्रों में से एक में कांसे से बना एक बड़ा बर्तन मिला। जब शोधकर्ताओं ने इस प्राचीन बर्तन को खोला, तो उन्हें इसके अंदर भारी मात्रा में एक तरल पदार्थ दिखाई दिया। विस्तृत जांच और विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई सामान्य तरल नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी बीयर है जो आज भी सुरक्षित है।

बर्तन में 15 कप से अधिक बीयर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कांसे के पात्र में लगभग 3.74 लीटर बीयर भरी हुई थी, जो कि 15 कप से भी अधिक की मात्रा है। पुरातत्वविदों ने बताया कि प्राचीन समय की शराब का इस तरह तरल रूप में मिलना और इतने लंबे समय तक सुरक्षित रहना अत्यंत दुर्लभ है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरल से कोई विशेष दुर्गंध नहीं आ रही थी और इसका रंग हल्का नीला-हरा दिखाई दे रहा था, जबकि तरल का स्वरूप काफी साफ था। यह स्थिति प्राचीन तकनीक और संरक्षण के तरीकों पर कई नए सवाल खड़े करती है।

क्या थी इस बीयर की सामग्री

वैज्ञानिकों ने इस प्राचीन पेय का गहन विश्लेषण किया है। उनके अनुमान के अनुसार, यह बीयर मुख्य रूप से बाजरे से तैयार की गई थी, या फिर इसमें बाजरे के साथ गेहूं और जौ का मिश्रण इस्तेमाल किया गया था। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि यह आज के दौर की तेज शराब जैसी नहीं थी। यह डिस्टिल्ड या आसुत शराब के बजाय किण्वन प्रक्रिया से तैयार की गई एक हल्की मादक पेय रही होगी, जिसका सेवन उस दौर की सभ्यता में किया जाता था।

कब्र में क्यों रखी गई थी बीयर

एक बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसी मृत व्यक्ति की कब्र में इतनी अधिक मात्रा में बीयर क्यों रखी गई थी? पुरातत्वविदों का मानना है कि उस समय की मान्यताओं के अनुसार, इसे परलोक की यात्रा के लिए उपहार के रूप में रखा गया होगा। ऐसी संभावना है कि उस काल के लोगों का विश्वास रहा होगा कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को खाने और पीने की आवश्यकता होती है, इसीलिए उसे उसकी अंतिम यात्रा के साथ यह बीयर भेंट की गई होगी।

हजारों साल तक खराब क्यों नहीं हुई

यह सबसे बड़ा आश्चर्य है कि कोई तरल पदार्थ 2200 वर्षों तक खराब कैसे नहीं हुआ? वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे कई कारक हो सकते हैं। पहला, उस इलाके का शुष्क और ठंडा वातावरण। दूसरा, जिस कांसे के पात्र में इसे रखा गया था, उसकी बनावट और उसे सील करने की तकनीक ने इसे बाहरी वातावरण से सुरक्षित रखा। साथ ही, कब्र के अंदर की विशेष परिस्थितियों ने इसे हजारों सालों तक सड़ने से बचाए रखा। वैज्ञानिक अब भी इस बात पर शोध कर रहे हैं कि इस संरक्षण की सटीक विधि क्या थी।

चीन में शराब का पुराना इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब चीन में प्राचीन शराब के अवशेष मिले हों। इससे पहले वर्ष 2024 में चीन के ही शान्शी प्रांत में 2300 साल पुरानी एक कब्र से बीयर के अवशेष मिले थे, जिसमें गेहूं, जौ, बाजरा और विभिन्न प्रकार की दालों के संकेत मिले थे। हालांकि, चीन में शराब बनाने का इतिहास और भी गहरा है। शोधकर्ताओं को हेनान प्रांत में लगभग 9000 साल पुराने मिट्टी के बर्तनों के भीतर चावल, शहद और फलों से निर्मित शराब के प्रमाण भी मिल चुके हैं, जो साबित करते हैं कि चीन की प्राचीन सभ्यताएं पेय निर्माण कला में काफी उन्नत थीं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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