मध्य प्रदेश
एक महीने पहले
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वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जमीन के भीतर रहने वाले कई जीव-जंतु बाहर आने लगते हैं। इस मौसम में सांपों का घरों में निकलना एक बेहद आम समस्या बन जाती है। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले सहित देश के कई हिस्सों में इन दिनों घरों में सांप घुसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा दिखने वाला जीव वाटर स्नेक यानी पानी का सांप है। स्थानीय लोग इसे देखकर अक्सर दहशत में आ जाते हैं और अनजाने में इसे मार देते हैं। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह सांप पूरी तरह से जहरमुक्त और सीधा होता है, जिसे मारना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
सर्प विशेषज्ञ आकाश सिंह राठौर की राय
छतरपुर जिले में बीते 6 सालों से सांपों को सुरक्षित बचाने का काम कर रहे सर्पमित्र आकाश सिंह राठौर ने इस सांप के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आकाश ने बकायदा सांपों को पकड़ने और उनके संरक्षण की पेशेवर ट्रेनिंग ली है। उनका कहना है कि छतरपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में वाटर स्नेक बहुत ही सामान्य रूप से पाया जाता है।
आकाश सिंह राठौर बताते हैं कि इस सांप में किसी भी प्रकार का जहर नहीं होता है। इसके बावजूद, कई बार लोग केवल डर और घबराहट के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। जब यह सांप किसी को काटता है, तो व्यक्ति अत्यधिक भयभीत हो जाता है, जिससे उसे दिल का दौरा पड़ जाता है। इस प्रकार, मौत सांप के जहर से नहीं बल्कि मानसिक तनाव और दहशत की वजह से होती है।
काटने पर क्या होता है असली खतरा?
यद्यपि पानी के सांप में जहर नहीं होता, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसके काटने पर कोई सावधानी न बरती जाए। सर्प विशेषज्ञ के अनुसार, असली खतरा संक्रमण यानी इंफेक्शन का होता है।
चूंकि वाटर स्नेक का पसंदीदा भोजन छिपकली, चूहा और मेंढक होते हैं, इसलिए इसके मुंह में कई प्रकार के बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं। यदि इस सांप ने हाल ही में किसी चूहे या छिपकली को अपना शिकार बनाया है और उसके बाद वह किसी इंसान को काट लेता है, तो इंसान के शरीर में संक्रमण फैल सकता है। इससे घाव वाली जगह पर गंभीर इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, इसके काटने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और टेटनस का टीका तथा आवश्यक प्राथमिक उपचार कराना चाहिए।
कैसे करें पानी वाले सांप की पहचान?
आकाश सिंह राठौर ने साधारण पानी वाले सांप को पहचानने के लिए कुछ बेहद आसान तरीके बताए हैं, जिससे आप जहरीले और बिना जहर वाले सांपों के बीच का अंतर आसानी से समझ सकते हैं:
- रंग और त्वचा: इस सांप की ऊपरी त्वचा का रंग मुख्य रूप से हल्का हरा या भूरा होता है, जिस पर पीले रंग के छोटे-छोटे धब्बे बने होते हैं। वहीं, इसके पेट का निचला हिस्सा पूरी तरह से सफेद या हल्के पीले रंग का होता है।
- शारीरिक बनावट: वाटर स्नेक का मुंह आगे से गोल आकार का होता है। इसके विपरीत, कोबरा जैसे बेहद जहरीले सांपों का मुंह आगे से काफी चौड़ा और फैला हुआ रहता है।
- लंबाई: वयस्क होने पर इस सांप की लंबाई सामान्यतः 5 फीट तक हो सकती है।
काटने के निशान से करें असली पहचान
सांप के काटने के बाद शरीर पर बनने वाले निशानों से भी यह पता लगाया जा सकता है कि सांप जहरीला था या नहीं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब कोई जहरीला सांप इंसान को काटता है, तो वह त्वचा पर केवल दो स्पष्ट बिंदु (टू डॉट्स) छोड़ता है। ये बिंदु उसके जहरीले दांतों के होते हैं। इसके विपरीत, जब कोई बिना जहर वाला सांप जैसे कि वाटर स्नेक काटता है, तो त्वचा पर बहुत सारे छोटे-छोटे डॉट्स बन जाते हैं। ये निशान सांप के पूरे जबड़े और दांतों की कतार के रूप में दिखाई देते हैं, जो दिखने में उसके मुंह के आकार के समान होते हैं।
खान-पान और इससे जुड़े बड़े भ्रम
पानी का सांप भोजन की तलाश में ही मानव बस्तियों और घरों का रुख करता है। इसके प्रिय भोजन में मेंढक, चूहे और छिपकलियां शामिल हैं। इन्हीं का पीछा करते हुए यह अक्सर घरों के कोनों, नालियों या ठंडी जगहों पर छिप जाता है।
हमारे समाज में पानी के सांपों को लेकर कई तरह के भ्रम फैले हुए हैं। बहुत से लोग यह मानते हैं कि पानी में रहने वाले सभी सांप अत्यंत विषैले होते हैं। वास्तव में, यह खतरा पूरी तरह से सांप की प्रजाति पर निर्भर करता है। तालाबों, नदियों, नहरों और कुओं जैसे मीठे पानी के स्रोतों में पाए जाने वाले अधिकांश सांप पूरी तरह से विषहीन होते हैं।
भारत में मीठे पानी में पाया जाने वाला सबसे आम सांप चेकर्ड कीलबैक है, जिसे आमतौर पर पानी वाला सांप कहा जाता है। यह देखने में भले ही डरावना लग सकता है और खतरा महसूस होने पर तेजी से हमला भी कर सकता है, लेकिन इसका काटना इंसानों के लिए कभी भी घातक नहीं होता है। इसलिए, अगली बार यदि आपके घर या खेत में ऐसा सांप दिखे, तो घबराने की बजाय वन्यजीव विभाग या किसी प्रशिक्षित सर्पमित्र को इसकी सूचना दें और इस बेकसूर जीव की जान बचाएं।
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