मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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छतरपुर जिले में इस बार पड़ रही भीषण गर्मी ने इंसानों के साथ-साथ पशुओं को भी बेहाल कर दिया है। हर किसी के मन में बस एक ही सवाल है कि आखिर मानसून जिले में कब बरसेगा और गर्मी से राहत कब मिलेगी। जिले में अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं, ऐसे में किसान भी खरीफ फसल की बोवनी के लिए मानसून की राह देख रहे हैं। लेकिन अभी तक जिले में मानसून सक्रिय न होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
कृषि मौसम वैज्ञानिक के अनुसार 22 जून 2026 के बाद जिले में मानसून दस्तक दे सकता है। हालांकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहुंचने से पहले ही मानसून कमजोर पड़ गया है, जिसके चलते दोनों राज्यों में यह अपनी सामान्य तारीख से पिछड़ गया है।
कहां अटकीं मानसूनी हवाएं
कृषि मौसम वैज्ञानिक हेमंत कुमार सिन्हा बताते हैं कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद मानसूनी हवाएं महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में ठहर गई हैं। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद हवाएं बिहार, झारखंड और आसपास के इलाकों में रुक गई हैं। मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से छतरपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश में बारिश का इंतजार लंबा हो गया है।
सामान्य तारीख से पिछड़ा मानसून
हेमंत कुमार के अनुसार आमतौर पर छत्तीसगढ़ में 13 जून और मध्य प्रदेश में 15 जून तक मानसून पहुंच जाता है, लेकिन इस बार गतिविधियां धीमी पड़ने के कारण मध्य प्रदेश में 19 से 22 जून के बीच मानसून पूरी तरह दस्तक देगा। फिलहाल केवल प्री मानसून की बारिश हो रही है। 19 जून के बाद मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा और इसके बाद झमाझम बारिश शुरू होगी। वहीं छत्तीसगढ़ में 18 जून के आसपास बारिश शुरू होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ की दहलीज पर अटका मानसून
उन्होंने बताया कि मानसून की रफ्तार इस समय छत्तीसगढ़ की दहलीज पर आकर रुक गई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्सों के साथ तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और भागों में आगे बढ़ चुका है।
जिले में प्री मानसून सक्रिय
हेमंत कुमार के मुताबिक मध्य प्रदेश में 18-19 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे सकता है, जबकि छतरपुर जिले में 22 जून तक मानसून पूरी तरह बरसने लगेगा। फिलहाल जिले में प्री मानसून सक्रिय है, जिसके चलते रुक-रुक कर बारिश हो रही है।
किसान कब करें बुवाई
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बोवनी के लिए अभी मानसून का इंतजार करना होगा। जब मानसून पूरी तरह बरसने लगे, तभी खेतों में बुवाई की प्रक्रिया शुरू करें। किसानों को बुवाई तभी करनी चाहिए जब लगातार 3 दिनों तक बारिश हो और खेत की मिट्टी में 10 से 15 इंच की गहराई तक नमी पहुंच जाए। चूंकि जिले में अभी केवल प्री मानसून सक्रिय है, इसलिए बुवाई के लिए पूरी तरह मानसून आने का इंतजार करना ही बेहतर है।
क्यों हुई मानसून में देरी
हेमंत कुमार बताते हैं कि इस बार प्रशांत महासागर में अलनीनो विकसित हो रहा है, जो मानसूनी हवाओं के आगे बढ़ने में अवरोध पैदा कर रहा है। इसी वजह से मध्य प्रदेश में मानसून देरी से दस्तक दे रहा है। साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर नहीं बन पा रहा, जिससे मानसूनी हवाओं की गति घट गई है। इसके अलावा छतरपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश में इस बार पड़ी तेज गर्मी और हीट वेव ने भी हवाओं की रफ्तार को धीमा किया है, जिसके चलते मानसून देर से पहुंच रहा है।
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