छपरा के युवा हमीद कमाल का कमाल, खुद बना रहे आटा मिल मशीनें, राजस्थान और यूपी तक है भारी डिमांड बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के छपरा जिले के रहने वाले युवा उद्यमी हमीद कमाल ने कम उम्र में ही स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश की है। वे अपने गांव में ही आटा मिल मशीनें तैयार कर रहे हैं, जिनकी मांग राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने हमीद कमाल

आज के दौर में जब देश के अधिकांश युवा नौकरियों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं और बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, तब बिहार के छपरा जिले के एक होनहार युवक ने अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है। हम बात कर रहे हैं छपरा जिले के लहलादपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ताजपुर बसही बलुआ टोला के निवासी हमीद कमाल की। हमीद उन युवाओं के लिए एक मिसाल हैं जो लीक से हटकर कुछ करने का जज्बा रखते हैं और बाजार के कड़े मुकाबले में भी अपनी जगह बनाने में सफल होते हैं।

आइडिया की शुरुआत और संघर्ष

हमीद कमाल की सफलता की कहानी काफी दिलचस्प है। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत एक छोटे से प्रयोग के साथ की थी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे कानपुर से एक आटा मिल मशीन लेकर आए थे, जिसकी उस समय बाजार में भारी मांग थी। जब उन्होंने उस मशीन का इस्तेमाल किया और उसे करीब से समझा, तो उन्हें इसे खुद बनाने का विचार आया। उन्होंने इस मशीन की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा और घर पर ही मशीनरी तैयार करने का काम शुरू कर दिया। उनके द्वारा बनाई गई आटा मिल मशीन गेहूं की सफाई करने से लेकर उसके आटे में बदलने और फिर अंत में उसकी पैकिंग करने तक का काम बेहद कुशलता से करती है।

कई राज्यों में पहुंच चुकी है मशीन

हमीद का यह छोटे स्तर का काम आज एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है। उनके द्वारा तैयार की गई आटा मिल मशीनों की चर्चा अब बिहार की सीमाओं को लांघकर पूरे भारत में हो रही है। हमीद बताते हैं कि उनके कारखाने में बनी मशीनों की बिक्री राजस्थान, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में धड़ल्ले से हो रही है। दूर-दराज के व्यापारी खुद छपरा आकर उनके पास से मशीनें खरीदने पहुंचते हैं। अब तक हमीद लगभग 200 आटा मिल मशीनें बेच चुके हैं, जो उनकी मेहनत और मशीनों की गुणवत्ता का प्रमाण है।

स्थानीय मजदूरों को मिला रोजगार

इस उद्योग की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल मशीन बेचना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार मुहैया कराना भी है। हमीद के कारखाने में छपरा के ही रहने वाले दो दर्जन से अधिक श्रमिक काम करते हैं। इनमें से कई ऐसे मजदूर हैं जो पहले दूसरे राज्यों में जाकर 8 से 12 घंटे तक ड्यूटी करते थे। वहां उन्हें न तो अच्छी कमाई हो पाती थी और न ही वे अपने परिवार के साथ समय बिता पाते थे। अब वही मजदूर अपने घर के पास ही सम्मानजनक काम पा रहे हैं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

5 वर्षों से मैन्युफैक्चरिंग का सफर

पिछले 5 वर्षों से लगातार फ्लावर मिल यानी आटा मिल मशीनें बनाने का काम कर रहे हमीद का मानना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। अगर उसे पूरे समर्पण और दिल से किया जाए, तो वही छोटा व्यवसाय एक बड़े साम्राज्य का रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि कानपुर से मंगाई गई शुरुआती मशीन उनके लिए एक मील का पत्थर साबित हुई। उसी मशीन के ट्रायल से उन्हें तकनीक की इतनी गहरी समझ मिली कि आज वे देश में सबसे बेहतर गुणवत्ता वाली मशीनें तैयार करने का दावा करते हैं।

युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर

हमीद कमाल का मानना है कि अगर कोई भी युवा अपना खुद का रोजगार शुरू करना चाहता है, तो वे उनके पास से मशीन खरीद कर ले जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मशीन को लगाकर न केवल कमाई की जा सकती है, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है। उन्होंने आटा मिल व्यवसाय के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे लोग कई तरह से व्यापार कर सकते हैं। कोई अन्य किसानों का गेहूं पीसने का काम कर सकता है, तो कोई खुद का ब्रांड बनाकर आटे की पैकिंग कर दुकानों पर 1 किलो, 5 किलो और 10 किलो के पैकेट में सप्लाई कर सकता है। इस तरह से यह व्यवसाय आत्मनिर्भर बनने का एक शानदार जरिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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