कबाड़ के कमाल से बनी टीवीएस बाइक जैसी इलेक्ट्रिक साइकिल, मात्र 5 रुपये के खर्च में चलती है 40 किलोमीटर बिहार 2 महीने पहले 64
बिहार के छपरा जिले के एक युवक ने कबाड़ के लोहे और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का उपयोग करके बेहद शानदार इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जिसकी निर्माण लागत केवल 8,000 रुपये है।

आज के आधुनिक युग में ऑटोमोबाइल सेक्टर के भीतर बहुत तेजी से बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। ऐसे कठिन समय में बाजार में एक से बढ़कर एक इलेक्ट्रिक गाड़ियां और साइकिलें आ रही हैं, जो सीधे तौर पर पारंपरिक पेट्रोल बाइक्स को कड़ी चुनौती दे रही हैं। लेकिन अब केवल बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी हमारे देश के होनहार युवा अपने तकनीकी दिमाग और कौशल से इन बड़ी कंपनियों को मात देने लगे हैं। ऐसा ही एक अनोखा और प्रेरणादायक मामला बिहार के छपरा से सामने आया है। यहां के एक स्थानीय युवक ने कबाड़ के लोहे और कुछ बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक सामानों के सटीक इस्तेमाल से एक बेहद मजबूत और तेज रफ्तार वाली इलेक्ट्रिक साइकिल बनाकर सबको हैरान कर दिया है।

सड़क पर लग जाती है देखने वालों की भारी भीड़

यह अनोखी और शानदार इलेक्ट्रिक साइकिल जब भी शहर की व्यस्त सड़कों पर निकलती है, तो राहगीरों की नजरें इस पर ठहर जाती हैं। इसका डिजाइन इतना अनूठा है कि जो भी इसे देखता है, देखता ही रह जाता है। छपरा की सड़कों पर जहां भी यह गाड़ी रुकती है, वहां इसे करीब से देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक लोगों का बड़ा हुजूम इकट्ठा हो जाता है। लोग इस अनोखे वाहन के आविष्कारक की प्रतिभा की सराहना करते नहीं थकते और इसकी निर्माण प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए उत्सुक दिखाई देते हैं।

कबाड़ के लोहे से तैयार की टीवीएस जैसी बाइक

इस कमाल की और अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल को तैयार करने वाले प्रतिभाशाली युवक का नाम अभिमन्यु कुमार है। वे छपरा सदर प्रखंड के जोगणिया कोठी (सलेमपुर) के रहने वाले हैं। अभिमन्यु अपने दैनिक जीवन में वेल्डिंग करने और पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मरम्मत का काम करते हैं। अपने इसी हुनर का उपयोग करते हुए उन्होंने कबाड़ में बेकार पड़े लोहे के टुकड़ों को जमा किया और उनसे एक मजबूत चेसिस यानी ढांचा तैयार किया। इस साइकिल को और भी ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए उन्होंने इसे टीवीएस मोटरसाइकिल जैसा एक स्पोर्टी लुक दिया है। इसमें साधारण साइकिल की तरह केवल पैडल ही नहीं हैं, बल्कि आधुनिक बाइक्स की तरह एक सटीक डिजिटल मीटर, रात के अंधेरे में रास्ता साफ दिखाने के लिए बेहद तेज रोशनी वाली हेडलाइट और सुरक्षा के लिए एक तेज आवाज वाला हॉर्न भी लगाया गया है।

मात्र 8,000 रुपये का खर्च और बेमिसाल खासियतें

अभिमन्यु द्वारा बनाई गई इस इलेक्ट्रिक साइकिल की लागत बहुत ही कम है और इसकी मजबूती और फीचर्स किसी महंगी गाड़ी से कम नहीं हैं। इस साइकिल की मुख्य विशेषताओं पर नजर डालें तो ये इस प्रकार हैं:

  • लागत: इस साइकिल को पूरी तरह से कबाड़ के लोहे और अन्य जरूरी बिजली उपकरणों की मदद से तैयार करने में कुल लागत मात्र 8,000 रुपये आई है।
  • माइलेज और रेंज: एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह इलेक्ट्रिक साइकिल बिना रुके पूरे 40 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करने में सक्षम है।
  • बिजली की कम खपत: इसे चार्ज करने का खर्च भी न के बराबर है। एक बार फुल चार्ज होने में केवल 5 रुपये की बिजली खर्च होती है।
  • दैनिक बचत: पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में इसके उपयोग से रोजाना का करीब 200 रुपये से लेकर 300 रुपये तक का बड़ा पेट्रोल खर्च बचाया जा सकता है।
  • लोडिंग क्षमता: इस साइकिल का ढांचा इतना मजबूत है कि इस पर दो लोग बेहद आसानी से बैठकर सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं।

बाजार में बढ़ रही है भारी मांग और आगे की योजना

इस नए और अनूठे आविष्कार के बाद से ही छपरा और उसके आसपास के इलाकों में इसकी चर्चा चारों तरफ हो रही है। अभिमन्यु कुमार ने बताया कि वह लगातार इस तरह के नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। इससे पहले भी उन्होंने दो से तीन अलग-अलग मॉडल्स की इलेक्ट्रिक साइकिलें बनाकर तैयार की थीं। लोगों को उनका यह शानदार कॉन्सेप्ट काफी पसंद आ रहा है और अब स्थानीय स्तर पर इस साइकिल को बनवाने की भारी मांग उठ रही है।

अभिमन्यु ने बताया कि व्यस्त रहने के कारण वे इस काम को पूरा समय नहीं दे पाते हैं। वेल्डिंग और रिपेयरिंग के मुख्य काम के चलते उन्हें रोजाना फुर्सत नहीं मिलती। इसलिए वे सर्दियों के मौसम में, जब उनका मुख्य काम थोड़ा धीमा पड़ता है, लोगों के ऑर्डर लेकर ऐसी विशेष साइकिलें तैयार करते हैं। फिलहाल वे इस साइकिल का गहन स्तर पर परीक्षण कर रहे हैं और आने वाले भविष्य में बड़े पैमाने पर इसका व्यापार शुरू करने की ठोस योजना बना रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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