गर्मी की छुट्टियों में स्कूलों का भारी होमवर्क बना सिरदर्द, पेरेंट्स पैसे देकर प्रोफेशनल से करवा रहे पूरा हरियाणा 2 घंटे पहले 1
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने शिकायत की है कि प्राइवेट स्कूल ग्रीष्म अवकाश में छोटे बच्चों को भारी होमवर्क दे रहे हैं, जिसे पूरा करवाने के लिए अभिभावक पैसे देकर प्रोफेशनल लोगों का सहारा ले रहे हैं। मंच ने ऐसा होमवर्क न देने की मांग उठाई है।

होमवर्क का कारोबार — यह सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को मिलने वाला भारी-भरकम होमवर्क अब सचमुच एक धंधे की शक्ल ले चुका है। जून के महीने में घूमने-फिरने की चाहत रखने वाले बच्चे होमवर्क करना नहीं चाहते, और उनकी समझ से परे दिए गए इस होमवर्क से परेशान अभिभावकों ने भी अपना तोड़ निकाल लिया है। अब हाल यह है कि पैसा खर्च कर बच्चों का होमवर्क प्रोफेशनल लोगों से पूरा करवाया जा रहा है।

पहले मौज-मस्ती, अब होमवर्क की उधेड़बुन

हरियाणा अभिभावक एकता मंच की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि पहले गर्मी की छुट्टियों में बच्चे अपने मां-बाप के साथ दादा-दादी, नाना-नानी और मामा-मामी के घर छुट्टियां बिताने जाया करते थे। पर्यटन यात्रा पर जाकर वे खूब मौज-मस्ती करते थे, लेकिन अब बच्चों से यह आनंद छिन गया है। मंच के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह स्कूल प्रबंधकों द्वारा छुट्टियों में दिया गया वह भारी-भरकम और बच्चों की समझ से परे होमवर्क है। इसी कारण बच्चे अपने नाना-नानी और दादा-दादी के घर नहीं जा पा रहे, और अगर कुछ दिनों के लिए जाते भी हैं तो वहां भी होमवर्क करने-करवाने की उधेड़बुन में ही उलझे रहते हैं।

छोटे बच्चों को ऐसा होमवर्क, जिसकी समझ ही नहीं

मंच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्कूल प्रबंधक बच्चों को जो होमवर्क देते हैं, जिसे देखकर बच्चों के साथ-साथ उनके मां-बाप के भी होश उड़ जाते हैं, उसका औचित्य आखिर क्या है। शिकायत में कहा गया कि नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से लेकर प्राथमिक कक्षा तक के बच्चों को ऐसा होमवर्क दिया जा रहा है, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी ही नहीं होती, फिर भी उसे पूरा तो करना ही है।

नतीजतन बच्चे होमवर्क पूरा करने के लिए अपने मां-बाप का सहारा लेते हैं। जिन बच्चों के अभिभावक पढ़े-लिखे होते हैं, वे तो किसी तरह मदद कर देते हैं, लेकिन जिनके मां-बाप ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, वे पैसा देकर प्रोफेशनल लोगों से होमवर्क पूरा करवाते हैं।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को होमवर्क देना ही नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे शिक्षा सत्र में बच्चों को केवल 25 से 30 दिन ही ग्रीष्मकालीन अवकाश के रूप में मिलते हैं, जिसमें वे नाना-नानी के घर जाना या मां-बाप के साथ पर्यटन पर जाकर मौज-मस्ती करना चाहते हैं। उनसे यह अवसर छीनना किसी भी तरह उचित नहीं है।

वहीं मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा और लीगल एडवाइजर बीएस बिरदी का कहना है कि स्कूल प्रबंधक होमवर्क देकर सीबीएसई और हरियाणा शिक्षा नियमावली के उस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसमें साफ कहा गया है कि प्री-प्राथमिक और प्राइमरी कक्षा तक के बच्चों को होमवर्क देना ही नहीं चाहिए। उनके मुताबिक स्कूल प्रबंधक अपने स्कूल का स्टेटस सिंबल दिखाने तथा प्रोफेशनल लोगों और दुकानदारों की कमाई कराने के लिए ही ऐसा भारी-भरकम होमवर्क देते हैं।

ऐसे प्रोजेक्ट कि उड़ जाएं होश

नेट क्वालिफाइड पीजीटी सरकारी टीचर डिंपल गौड़ कहती हैं कि एक ओर हरियाणा सरकार अपने सरकारी स्कूलों के बच्चों को होमवर्क न देकर उन्हें नाना-नानी के घर और पर्यटन यात्रा पर जाने का मौका दे रही है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल संचालक, खासकर सीबीएसई स्कूल वाले, ग्रीष्म अवकाश में बच्चों को होमवर्क के रूप में ऐसे प्रोजेक्ट दे रहे हैं जिन्हें देखकर हैरानी होती है।

इनमें इलेक्ट्रिक सर्किट, एम्यूजमेंट पार्क का थ्रीडी मॉडल, दिल्ली मेट्रो और फ्लाईओवर का प्रोजेक्ट, थर्माकोल का एफिल टॉवर, कंप्यूटर का वर्किंग मॉडल और संस्कृति से गणित के फार्मूलों की डिक्शनरी बनाने जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

बाजार से बने-बनाए प्रोजेक्ट खरीद रहे अभिभावक

इस सबसे प्रोफेशनल लोगों की खूब कमाई हो रही है। ऐसे बने-बनाए प्रोजेक्ट बाजार में आसानी से मिल रहे हैं, जिन्हें अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों के लिए खरीद रहे हैं। बाद में ये प्रोजेक्ट या तो स्कूल के शोकेस की शोभा बढ़ाते हैं या स्टोर में फेंक दिए जाते हैं।

अभिभावक कुसुम बंसल, परमेश्वरी, नीतू और रश्मि का कहना है कि जो होमवर्क 10वीं-11वीं के छात्रों के लिए भी बहुत मुश्किल होता है, उसे छोटी कक्षाओं के बच्चों को देना सही नहीं है। उनका कहना है कि होमवर्क का बच्चों के ग्रेड से कोई लेना-देना नहीं होता और न ही इसके लिए बच्चों को कोई अंक दिए जाते हैं।

कार्रवाई की मांग

मंच ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, चेयरमैन सीबीएसई और चेयरमैन राष्ट्रीय बाल संरक्षण व अधिकार आयोग से मांग की है कि नियमों के विरुद्ध बच्चों को होमवर्क देने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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