हरियाणा
5 घंटे पहले
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हरियाणा और चंडीगढ़ में हुए बहुचर्चित IDFC बैंक घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में बेहद चौंकाने वाले और शर्मनाक खुलासे सामने आए हैं। 604 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम घोटाले में हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार, इस घोटाले के पैसों का इस्तेमाल न केवल वित्तीय हेरफेर के लिए किया गया, बल्कि अधिकारियों की अय्याशी और मनोरंजन पर भी पानी की तरह बहाया गया। इसमें सबसे गंभीर आरोप वर्ष 2000 बैच के IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल पर लगे हैं, जिन्होंने सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से मिली राशि से कथित तौर पर खूब मौज-मस्ती की।
IAS पंकज अग्रवाल की अय्याशी और मुजरा पार्टियों का सच
CBI की चार्जशीट में तत्कालीन स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव और बाद में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात रहे IAS पंकज अग्रवाल को लेकर बेहद आपत्तिजनक खुलासे किए गए हैं। आरोप है कि पंकज अग्रवाल ने सरकारी खजाने की राशि पर जमकर ऐश की। इस अय्याशी के लिए IDFC बैंक के तत्कालीन अधिकारी रिभव ऋषि ने उनके लिए मुजरा पार्टियों, आलीशान होटलों में रुकने और महिलाओं की व्यवस्था करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
चार्जशीट के मुताबिक, पंचकूला के पास जीरकपुर के एक निजी होटल में नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कम से कम चार बार मुजरा पार्टियां आयोजित की गई थीं। इन पार्टियों में बुलाए गए डांस कलाकारों, खान-पान और महंगी शराब का सारा खर्च बैंक अधिकारी रिभव ऋषि द्वारा वहन किया गया था।
होटलों में सुइट बुकिंग और भारी-भरकम भुगतान
जांच के दौरान कई विशिष्ट तारीखों पर किए गए भुगतानों का भी ब्योरा मिला है:
- 24 दिसंबर 2025: चंडीगढ़ के ट्रिब्यून चौक के पास स्थित एक नामी होटल में एक महिला को बुलाया गया था। इस पूरी व्यवस्था का खर्च रिभव ऋषि के बेहद करीबी सहयोगी अभय कुमार ने चुकाया था।
- 10 जनवरी 2026: मोहाली के एक होटल में एक आलीशान सुइट बुक किया गया, जहां महिला को बुलाया गया था। इसके लिए रिभव ऋषि के खाते से 75,000 रुपये का भुगतान किया गया था।
- अक्टूबर 2025: देश की राजधानी दिल्ली के एक बड़े होटल में पंकज अग्रवाल के रुकने के लिए रिभव ऋषि के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर कमरा बुक किया गया था।
- पत्नी के लिए चंडीगढ़ में पार्टी: अक्टूबर 2025 में ही पंकज अग्रवाल की पत्नी के मनोरंजन के लिए चंडीगढ़ के एक होटल में एक शानदार पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी का पूरा खर्च भी रिभव ऋषि ने नकद भुगतान करके उठाया था।
आरोपी IAS अधिकारियों की सूची और घोटाले का दायरा
CBI ने इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में हरियाणा सरकार के छह वरिष्ठ IAS अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इन अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं:
- साकेत कुमार
- राम कुमार सिंह
- पंकज अग्रवाल
- प्रदीप कुमार
- विनीत गर्ग
- मोहम्मद शाइन
इस पूरे मामले में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें सरकारी विभागों के अधिकारियों के अलावा बैंक के कर्मचारी और बिचौलिए भी शामिल हैं।
ED की एंट्री और ज्वेलर्स के ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अवैध धन की हेराफेरी के कोण से अपनी जांच शुरू की है। जांच के दौरान यह पाया गया कि IDFC बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे गए सरकारी खातों के बैलेंस के साथ भारी छेड़छाड़ की गई थी। इस काले धन को ठिकाने लगाने के लिए सर्राफा बाजार के कई बड़े व्यापारियों की मदद ली गई थी। इसी कड़ी में ED ने कार्रवाई करते हुए कई संदिग्ध ज्वेलर्स के ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी।
ED की टीम ने जिन प्रमुख ठिकानों पर रेड डाली, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- मलिक ज्वेलर्स
- केएलजी ज्वेल्स
- श्याम ज्वैलर्स
- एमबी गोल्ड ट्रेडर्स
- सुंदर ज्वेलर्स
- गौरव कंसल
जांच एजेंसी के अनुसार, गौरव कंसल ने इस घोटाले की अवैध रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने और कई स्तरों पर घुमाने में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
कैसे अंजाम दिया गया 600 करोड़ का महाघोटाला?
चंडीगढ़ और हरियाणा के सरकारी विभागों की 600 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक राशि को आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर मिलीभगत से हड़प लिया था। इस सुनियोजित साजिश में सरकारी खातों के पैसों का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया और कागजों पर झूठे बैलेंस दिखाए गए। हालांकि, घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद कानूनी दबाव के चलते IDFC बैंक को यह पूरी रकम सरकार को वापस लौटानी पड़ी थी। फिलहाल CBI और ED दोनों ही एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि भ्रष्टाचार के इस बड़े नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
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