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एक घंटा पहले
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विचारों
इस्तेमाल की हुई कार खरीदते समय अधिकतर खरीदार उसकी मौजूदा कीमत और हालत को ही प्राथमिकता देते हैं। लेकिन एक छोटी-सी चूक आगे चलकर हजारों रुपये के घाटे की वजह बन सकती है। समझदारी इसी में है कि ऐसी गाड़ी चुनी जाए जिसकी रीसेल वैल्यू लंबे समय तक मजबूत बनी रहे, ताकि कई साल इस्तेमाल करने के बाद भी उसे बेचने पर अच्छी रकम वापस मिल सके।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पुरानी कार खरीदना एक बेहद व्यावहारिक फैसला माना जाता है, बशर्ते सही मॉडल का चयन किया जाए। ज्यादातर लोग केवल गाड़ी का लुक और दाम देखकर सौदा कर लेते हैं और सबसे अहम पहलू यानी रीसेल वैल्यू को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि बाजार में लगातार मांग में रहने वाली कोई दमदार सेडान या हैचबैक चुनी जाए, तो वर्षों के इस्तेमाल के बाद भी उसे बेचते समय बड़ा आर्थिक झटका नहीं लगता।
मारुति सुजुकी, होंडा और हुंडई जैसी कंपनियों के कुछ मॉडल अपनी मजबूत बिल्ड क्वालिटी, कम रखरखाव खर्च और देशभर में फैले सर्विस नेटवर्क के दम पर पुराने होने पर भी अपनी कीमत बरकरार रखते हैं। आइए ऐसी ही तीन भरोसेमंद कारों पर नजर डालते हैं।
1. Maruti Suzuki Swift
हैचबैक वर्ग में मारुति स्विफ्ट आज भी भारतीय ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है। स्पोर्टी डिजाइन और शानदार माइलेज वाली यह कार सेकंड हैंड बाजार में आते ही तुरंत बिक जाती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका कम मेंटेनेंस और आसानी से उपलब्ध स्पेयर पार्ट्स हैं।
युवाओं से लेकर छोटे परिवारों तक में इसकी भारी मांग के चलते 3 से 5 साल पुरानी स्विफ्ट भी अपनी मूल कीमत का करीब 65% से 70% हिस्सा आसानी से वसूल कर लेती है, जिससे आपका निवेश सुरक्षित बना रहता है।
2. Honda City
अगर आप एक प्रीमियम और मजबूत सेडान की तलाश में हैं, तो होंडा सिटी से बेहतर विकल्प शायद ही कोई हो। दशकों से मिड-साइज सेडान सेगमेंट में अपना दबदबा बनाए रखने वाली इस कार का i-VTEC पेट्रोल इंजन अपनी बेमिसाल परफॉर्मेंस और लंबी उम्र के लिए मशहूर है।
आरामदायक केबिन और प्रीमियम राइड क्वालिटी के कारण पुरानी होंडा सिटी की रीसेल वैल्यू बेहद शानदार रहती है। सेकंड हैंड बाजार में यह कार 3 साल बाद भी अपनी कीमत का करीब 75% हिस्सा बनाए रखने का दम रखती है।
3. Maruti Suzuki Dzire
कम बजट में सेडान का अनुभव और बेहतरीन माइलेज चाहने वालों के लिए मारुति डिजायर एक उम्दा विकल्प है। निजी और कमर्शियल, दोनों ही वर्गों में जबरदस्त मांग होने के चलते इस गाड़ी का डेप्रिसिएशन रेट यानी कीमत घटने की दर बेहद कम रहती है।
इसकी मैकेनिकल सादगी और बेहतरीन रीसेल वैल्यू का नतीजा यह है कि वर्षों बाद जब आप इसे पुरानी गाड़ियों के बाजार में बेचने निकलेंगे, तो खरीदारों की कोई कमी नहीं रहेगी और आपको शानदार रिटर्न मिलेगा।
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