BSF का मानवीय चेहरा: पद्मा नदी में डूबे 10 बांग्लादेशियों को बचाया, 30 दिन के नवजात को दी नई जिंदगी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात BSF के जवानों ने दरियादिली दिखाते हुए नदी में डूबी नाव के 10 यात्रियों को सकुशल बाहर निकाला। इनमें शामिल 30 दिन के एक नवजात की जान बचाना जवानों की सतर्कता और बहादुरी का बड़ा उदाहरण है।

सरहद पार मानवता की मिसाल

भारत और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल यानी BSF के जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इंसानियत का धर्म सबसे बड़ा होता है। सरहद पर कड़ी चौकसी के बीच जब बात किसी की जिंदगी बचाने की आती है, तो ये जांबाज जवान नागरिकता की सीमाओं से ऊपर उठकर काम करते हैं। हाल ही में मालदा सेक्टर में एक दिल दहला देने वाली घटना के दौरान BSF के जवानों ने देवदूत बनकर 10 बांग्लादेशी नागरिकों को मौत के मुंह से खींच लिया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में महज 30 दिन के एक नवजात शिशु की जान बचाना सबसे चुनौतीपूर्ण और भावुक करने वाला क्षण रहा।

पद्मा नदी में हुआ हादसा

यह पूरी घटना 12 सितंबर को सामने आई, जब BSF की 71वीं बटालियन के जवान खंडुआ बॉर्डर आउट पोस्ट के पास अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। जवान दूरबीन की मदद से सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहे थे। उसी दौरान उनकी नजर पद्मा नदी के अशांत पानी पर पड़ी। जवानों ने देखा कि नदी में एक नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज बहाव में पलट गई। नाव पर सवार लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। स्थिति अत्यंत गंभीर थी क्योंकि नदी का बहाव बहुत तीव्र था, जिससे महिलाएं, पुरुष और बच्चे पानी में डूब रहे थे और बहते हुए भारतीय सीमा की तरफ आ रहे थे।

तेजी से शुरू हुआ बचाव कार्य

घटना की गंभीरता को भांपते हुए BSF जवानों ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। बिना किसी देरी के जवानों ने मोर्चा संभाला और अपनी स्पीड बोट लेकर सीधे नदी के बीचों बीच पहुंच गए। घटनास्थल पर मौजूद जवानों के लिए चुनौतीपूर्ण हालात थे, लेकिन उनकी तत्परता ने बड़ा हादसा होने से रोक दिया। जवानों ने जोखिम भरा रेस्क्यू अभियान चलाया और डूब रहे लोगों को एक एक कर पानी से बाहर निकाला। सुरक्षित रूप से सभी 10 लोगों को नाव पर चढ़ाया गया। इन लोगों में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे। इसके अलावा एक अत्यंत छोटा नवजात भी था, जिसकी उम्र महज 30 दिन बताई गई है।

नवजात को मिला जीवनदान

बचाव के दौरान नवजात बच्चे की स्थिति चिंताजनक थी। नदी के ठंडे और तेज बहाव के कारण बच्चा कांप रहा था और उसका दम घुट रहा था। BSF की टीम ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल उसे प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की। बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत पास के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज शुरू हुआ। राहत की बात यह है कि अस्पताल में समुचित उपचार मिलने के बाद नवजात शिशु की हालत अब पूरी तरह स्थिर और सामान्य बनी हुई है। जवानों के त्वरित निर्णय ने एक परिवार को उनका चिराग वापस लौटा दिया।

बांग्लादेशी नागरिकों का क्या कहना है

रेस्क्यू किए गए लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, वे सभी बांग्लादेश के जोहारपुर गांव के निवासी हैं। वे चपाई नवाबगंज से अपने गांव जोहारपुर की ओर नाव से जा रहे थे, तभी बीच रास्ते में नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद वे पानी के बहाव में बहते हुए अनजाने में ही भारतीय सीमा के पास पहुंच गए थे। यदि उस समय BSF के जवान वहां मौजूद न होते या उनकी नजर उन पर नहीं पड़ती, तो यह घटना एक बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी। BSF ने न केवल भारतीय सरहद की सुरक्षा का जिम्मा उठा रखा है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीमा के इस पार और उस पार इंसानियत की मिसाल पेश करने में भी वे सबसे आगे रहते हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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