हज के बाद जब मोहम्मद रफी ने गाया वह सदाबहार रोमांटिक गाना, संगीत जगत में मच गई थी खलबली; आज भी दिलों पर करता है राज मनोरंजन एक महीने पहले 75
सुरों के सरताज मोहम्मद रफी के जीवन में एक ऐसा कठिन दौर भी आया था जब उन्हें गायकी छोड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन फिर उन्होंने मदन मोहन के निर्देशन में एक ऐसा गाना गाया जिसने इतिहास रच दिया।

भारतीय संगीत जगत के इतिहास में मोहम्मद रफी एक ऐसा नाम हैं, जिनकी आवाज ने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है। उन्होंने लता मंगेशकर से लेकर अपने दौर के तमाम दिग्गज गायकों और संगीतकारों के साथ मिलकर अनगिनत सदाबहार गाने दिए। आज भी उनके गाए गीत लोगों के दिलों में एक खास जगह रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस महान फनकार के जीवन में एक ऐसा मोड़ भी आया था, जब उन्हें संगीत की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहने की सलाह दे दी गई थी। यह वह समय था जब हिंदी सिनेमा के गलियारों में रफी साहब की उपेक्षा की जाने लगी थी और उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया था।

70 के दशक का वह मुश्किल दौर और धार्मिक सलाह

साल 1970 का दशक मोहम्मद रफी के निजी और पेशेवर जीवन के लिए भारी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। इस दौर में संगीत की दुनिया में बड़ा बदलाव आ रहा था और गायक किशोर कुमार के गाने काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। इसी दौरान मोहम्मद रफी मक्का में पवित्र हज यात्रा पर गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब वे हज करके वापस लौटे, तो उन्हें किसी धार्मिक जानकार ने यह सलाह दे दी कि अब वे एक 'हाजी' बन चुके हैं, इसलिए उन्हें अब फिल्मों में गाना बंद कर देना चाहिए। इस सलाह का रफी साहब पर गहरा असर हुआ और उन्होंने खुद को संगीत से पूरी तरह दूर कर लिया। वे लगभग 8 महीने तक गायकी की दुनिया से दूर रहे। हालांकि, दिग्गज संगीतकार नौशाद के समझाने और उनकी सलाह पर वे दोबारा माइक के सामने लौटे, लेकिन उनके लिए वापसी की यह राह बेहद कठिन साबित हुई क्योंकि उद्योग में उनके लिए पहले जैसा माहौल नहीं बचा था।

जब फिल्म निर्माताओं ने फेर लिया था मुंह

वापसी करने के बाद मोहम्मद रफी को काम पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा था। उनके पास बहुत कम काम आ रहा था, जिसके चलते वे अंदर ही अंदर काफी मायूस रहने लगे थे। उस कठिन समय में वे अपने दिल का हाल अपने सबसे करीबी दोस्तों से साझा करते थे। संगीत जगत के जाने-माने गायक महेंद्र कपूर उनके ऐसे ही एक बेहद करीबी दोस्त थे, जिनसे रफी साहब ने अपनी मायूसी और दर्द बयां किया था। रफी साहब ने उन्हें बताया था कि जो निर्माता और निर्देशक कभी उनके बंगले के चक्कर काटा करते थे, वे अब उनसे नजरें चुराने लगे हैं। यहाँ तक कि कई संगीतकारों का रवैया भी उनके प्रति पूरी तरह बदल चुका था और वे उनसे गाने गवाने से कतरा रहे थे।

मदन मोहन की धुन और रफी साहब की बेचैनी

हज पर जाने से पहले रफी साहब ने 1970 के दशक में 'यह दुनिया यह महफिल' जैसे कई सुपरहिट गाने गाए थे, लेकिन हज से लौटने के बाद हालात उनके पक्ष में नहीं थे। ऐसे निराशाजनक माहौल के बीच दिग्गज संगीतकार मदन मोहन ने रफी साहब पर भरोसा जताया। उन्होंने रफी साहब से एक बेहद खूबसूरत रोमांटिक गाना रिकॉर्ड करवाया। गाना रिकॉर्ड होने के बाद रफी साहब को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह गीत आगे चलकर क्या कमाल करने वाला है। रिकॉर्डिंग के बाद उन्होंने अपने दोस्त महेंद्र कपूर को अपने बंगले पर आमंत्रित किया। रफी साहब ने महेंद्र कपूर को बताया कि मदन मोहन ने उन्हें एक नया गाना दिया है और फिर उन्होंने अपने उसी अंदाज में वह गाना महेंद्र कपूर को गुनगुनाकर सुनाया।

'तुम जो मिल गए हो' का ऐतिहासिक जादू

मदन मोहन ने यह जादुई गाना वर्ष 1973 में आई फिल्म 'हंसते जख्म' के लिए तैयार किया था। जब यह गाना रिलीज हुआ, तो इसने पूरे देश में तहलका मचा दिया। इस एक गाने ने मोहम्मद रफी की गायकी का लोहा एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने मनवा दिया। जैसे ही यह गीत लोगों के बीच पहुंचा, हर कोई रफी साहब की आवाज का दीवाना हो गया। इस गाने की सफलता ने उन फिल्म निर्माताओं और संगीतकारों के बीच हड़कंप मचा दिया, जो रफी साहब को धीरे-धीरे भूलते जा रहे थे। इस गाने को मशहूर अभिनेत्री प्रिया राजवंश और अभिनेता नवीन निश्चल पर बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था, और इसके दिल को छू लेने वाले बोल महान गीतकार कैफी आजमी ने लिखे थे। आज करीब 53 साल बीत जाने के बाद भी यह गाना उतना ही ताजा लगता है और आज की युवा पीढ़ी के दिलों की भी धड़कन बना हुआ है।

कमबैक के बाद सफलताओं का नया सिलसिला

'तुम जो मिल गए हो' की अपार सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नया जीवनदान दिया। इसके बाद उनके पास एक बार फिर बेहतरीन गानों की लाइन लग गई। इसी कड़ी में आगे चलकर उनका गाया हुआ गाना 'आज मौसम बड़ा बेईमान है' रिलीज हुआ, जिसने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इसके बाद रफी साहब ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने इंडस्ट्री के हर छोटे-बड़े संगीतकार के साथ मिलकर एक से बढ़कर एक बेहतरीन और नायाब नगमे पेश किए। संगीत जगत में उनके इसी असाधारण योगदान के लिए साल 1977 में आए उनके प्रसिद्ध गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' के लिए उन्हें प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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