बचपन की जानलेवा बीमारी को मात देकर कॉमेडी क्वीन बनीं उपासना सिंह, फर्श से अर्श तक का सफर मनोरंजन एक घंटा पहले 2
मशहूर अभिनेत्री उपासना सिंह ने न केवल अपनी कॉमेडी से लाखों लोगों का दिल जीता है, बल्कि उन्होंने बचपन में एक गंभीर दिल की बीमारी से लड़कर मौत को भी मात दी है। पंजाब के होशियारपुर से निकलकर मनोरंजन जगत में अपनी जगह बनाने तक का उनका संघर्ष किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है।

मौन संघर्ष और हौसले की कहानी

मनोरंजन की दुनिया में अपनी बेमिसाल कॉमेडी टाइमिंग और शानदार अदाकारी से दर्शकों को हंसाने वाली उपासना सिंह का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। आज लोग भले ही उन्हें स्क्रीन पर देखकर लोटपोट हो जाते हों, लेकिन उनकी असल जिंदगी के शुरुआती दिन किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं थे। उपासना को बचपन से ही कला और अभिनय का गहरा शौक था। वे होशियारपुर की गलियों से निकलकर अभिनय की दुनिया में एक बड़ा नाम बनने का सपना देख रही थीं, लेकिन उनकी राह में एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी थी।

जानलेवा बीमारी और डॉक्टरों की चेतावनी

उपासना सिंह जब स्कूल में थीं, तो डांस और स्टेज परफॉरमेंस में उनकी खासी दिलचस्पी थी। वे अक्सर दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती थीं। हालांकि, डांस के दौरान वे कई बार अचानक बेहोश होकर गिर जाती थीं। जब जांच हुई, तो पता चला कि उन्हें 'दिल में छेद' होने जैसी एक बेहद गंभीर और जानलेवा समस्या है। स्थिति इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने भी स्पष्ट कह दिया था कि यदि जल्द से जल्द ऑपरेशन नहीं किया गया, तो उपासना की जान बचाना नामुमकिन हो जाएगा।

उनकी यह लड़ाई आसान नहीं थी। उन्हें लंबी चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में उनका सफल ऑपरेशन किया गया। उस दौर में उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ थी। मौत को बहुत करीब से देखने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों से हार नहीं मानी और पूरी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सामान्य जीवन की ओर वापसी की।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

बीमारी से उबरने के बाद उपासना सिंह ने अपने हुनर को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ड्रामेटिक आर्ट्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की ताकि वे अपनी कला को और बेहतर तरीके से समझ सकें। उनके अभिनय करियर का आगाज राजस्थानी फिल्म 'बाई चली सासरिए' से हुआ। इस पहली फिल्म ने ही उन्हें क्षेत्रीय सिनेमा में रातों-रात एक जाना-माना चेहरा बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी, पंजाबी, भोजपुरी व गुजराती समेत कई भाषाओं में 100 से अधिक फिल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

बॉलीवुड में पहचान और यादगार किरदार

बॉलीवुड की बात करें, तो उपासना को फिल्म 'जुदाई' में एक बेहद यादगार और बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे दिग्गजों के बीच भी उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उनका मशहूर डायलॉग 'अब्बा डब्बा जब्बा' आज भी दर्शकों को खूब हंसाता है। इसके अलावा उन्होंने 'हंगामा', 'हलचल' और 'एतराज' जैसी सुपरहिट फिल्मों में भी अपने कॉमिक अंदाज से दर्शकों का मनोरंजन किया। अपनी दमदार मौजूदगी के कारण वे फिल्म निर्देशकों की पहली पसंद बन गईं।

कॉमेडी नाइट्स और पिंकी बुआ का जादू

फिल्मों के बाद टेलीविजन की दुनिया ने उपासना सिंह को हर घर का सदस्य बना दिया। कॉमेडी शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में निभाया गया उनका 'पिंकी बुआ' का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। इस शो के जरिए उन्हें जो लोकप्रियता मिली, वह उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। शो में आने वाले सेलिब्रिटीज के साथ उनका सिग्नेचर डायलॉग 'कौन है ये आदमी, कहां से आया है?' इंटरनेट पर जमकर वायरल हुआ था। उपासना सिंह का जीवन हमें यह सिखाता है कि अगर मन में सच्ची लगन और हौसला हो, तो शरीर की कोई भी बड़ी बीमारी आपके सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बन सकती।

अर्जुन कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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