मीना कुमारी की आखिरी ख्वाहिश जो मोहम्मद रफी ने की पूरी, बीमारी के दिनों में यही गीत बना था एक्ट्रेस के दर्द की दवा मनोरंजन एक महीने पहले 18
जीवन के अंतिम दिनों में लीवर सिरोसिस से जूझ रही मीना कुमारी के लिए एक गीत राहत का सहारा बन गया था। मौत के बिस्तर पर पड़ी अभिनेत्री की गुजारिश पर मोहम्मद रफी ने उन्हें वही गीत गाकर सुनाया था।

हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी ने अपने करियर में कई यादगार गीत दिए, मगर इनमें से एक गीत तो उनकी जिंदगी का सहारा ही बन गया था। जिंदगी के जिस मोड़ पर बीमारियों ने उन्हें बिस्तर पर ला दिया था, उस दौर में यही गीत उनके लिए दर्द की दवा जैसा बन चुका था। अपने आखिरी दिनों में मीना कुमारी ने इसी गीत को मोहम्मद रफी की आवाज में सुनने की इच्छा भी जाहिर की थी।

रफी साहब टाल नहीं पाए मीना कुमारी की गुजारिश

जब मीना कुमारी मौत के बिस्तर पर अपनी जिंदगी के आखिरी दिन गुजार रही थीं, उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग उनसे मिलने आते थे। एक बार मोहम्मद रफी भी उनसे मुलाकात के लिए पहुंचे। उस मौके पर मीना कुमारी ने उनसे गुजारिश की कि वह उन्हें वही गीत गाकर सुनाएं। रफी साहब ने भी उनकी यह फरमाइश पूरी की और उनके लिए वह गीत गाया।

अपनी अदाकारी और खूबसूरती से अलग पहचान बनाने वाली मीना कुमारी की जिंदगी दुखों से भरी रही। उनका आखिरी वक्त काफी मुश्किलों में बीता। वह लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। लंबे समय तक उनका इलाज चला, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उस कठिन दौर में एक गीत ही था जो उन्हें तकलीफ भरे दिनों में राहत की सांस देता था।

1961 की फिल्म का वह गीत जो बना सहारा

मीना कुमारी जब भी यह गीत गातीं, उन्हें सुकून मिलता था। साल 1961 में उनकी फिल्म 'प्यार का सागर' आई थी, जिसमें उनके साथ अभिनेता राजेंद्र कुमार नजर आए थे। वैसे तो इस फिल्म में कई खूबसूरत गीत थे, मगर एक गीत ने तो इतिहास ही रच दिया था। 'मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले' — यही गीत मीना कुमारी अक्सर गुनगुनाया करती थीं। इस गीत को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी और यही उनके दर्द की दवा बन चुका था।

गीत बन गया था जीने की वजह

उस वक्त यह गीत मीना कुमारी के जीने की वजह बन चुका था। इंडस्ट्री के वे लोग जो कभी उनके साथ काम कर चुके थे और जो उनके करीबी थे, उनसे मिलने उनके घर आया करते थे। इसी तरह एक बार जाने-माने गायक मोहम्मद रफी भी उनके घर पहुंचे। मौत के बिस्तर पर पड़ी मीना कुमारी ने उनसे वही गीत गाने की रिक्वेस्ट की, जिसे वह अक्सर गाया करती थीं। रफी साहब ने उनकी बात रखी और वह गीत सुनाया। यह गीत उनकी आत्मा में बस चुका था।

गीत से जुड़ी खास बातें

बता दें कि 'प्यार का सागर' फिल्म के इस गीत को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज किया था। गीत के बोल असद भोपाली ने लिखे थे। फिल्म के गानों को आशा भोसले, शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने आवाज दी थी। मीना कुमारी जब भी इस गीत को गातीं, अपने सारे गम भूल जाती थीं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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