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एक घंटा पहले
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जाह्नवी कपूर की फिल्म 'पेद्दी' इन दिनों एक विवाद के केंद्र में है। फिल्म में अभिनेत्री के किरदार को जिस अंदाज में पेश किया गया है, उसे लेकर खूब आलोचना हो रही है। निर्देशक बुच्ची बाबू सना पर अभिनेत्री को ऑब्जेक्टिफाई और सेक्शुअलाइज करने तक के आरोप लग रहे हैं। इसी बहस के बीच जया बच्चन और करीना कपूर ने फिल्मों में महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाए जाने के मुद्दे पर खुलकर अपनी राय जाहिर की है।
विवाद की जड़ क्या है
'पेद्दी' में जाह्नवी के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। कई लोगों का मानना है कि फिल्म में उनके किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस बनाकर और ऑब्जेक्टिफाई करके दिखाया गया है। अब इसी मसले पर करीना कपूर और जया बच्चन ने भी अपना पक्ष रखा है। दोनों का ही मानना है कि पर्दे पर किसी अभिनेत्री को आकर्षक दिखाने का मतलब यह कतई नहीं है कि महिलाओं को भड़काऊ अंदाज में पेश किया जाए। जाह्नवी के किरदार को लेकर उठे इस विवाद के बीच उनके बयानों ने पूरी बहस को एक नई दिशा दे दी है।
जया बच्चन ने सुनाया अपना अनुभव
इस चर्चा के बीच जया बच्चन का एक बयान भी वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि वैसे तो किसी ने कभी उनके साथ ऐसा करने की हिम्मत नहीं की, लेकिन करियर में एक बार ऐसा जरूर हुआ जब एक निर्देशक ने उन्हें ऑब्जेक्टिफाई करने की कोशिश की थी। इसके बाद जया ने उस निर्देशक के साथ दोबारा कभी काम नहीं किया।
करीना कपूर ने दिए काजोल और श्रीदेवी के उदाहरण
जया बच्चन के अलावा करीना कपूर ने भी इस विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर सेंशुअल दिखने के लिए छोटे या रिवीलिंग कपड़े पहनना जरूरी नहीं है, और न ही इसी से ग्लैमर नजर आता है या दर्शक खिंचे चले आते हैं।
अपनी बात को साबित करने के लिए करीना ने उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि 'कभी खुशी कभी गम' के गाने 'सूरज हुआ मद्धम' में काजोल ने बिना अपना बदन दिखाए दर्शकों का दिल जीत लिया था। इसके साथ ही उन्होंने श्रीदेवी का जिक्र करते हुए कहा कि 'चांदनी' के गाने 'तेरे मेरे होंठों पे' में श्रीदेवी ने साड़ी में ही लोगों के दिल पर राज किया था।
सास शर्मिला टैगोर का भी किया जिक्र
करीना ने अपनी सास शर्मिला टैगोर का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 'आराधना' के ब्लॉकबस्टर गाने 'रूप तेरा मस्ताना' में शर्मिला टैगोर पूरी तरह ढकी हुई थीं, फिर भी इस गाने से वह छा गई थीं। करीना का कहना था कि पर्दे पर सेंशुअलिटी का कपड़ों या महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाने से कोई संबंध नहीं है।
निर्देशक का पक्ष
दरअसल, 'पेद्दी' को लेकर यह बहस इसलिए छिड़ी क्योंकि फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज करने के आरोप लगे। लोग निर्देशक बुच्ची बाबू सना पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि सिनेमा का मकसद लोगों का मनोरंजन करना, उन्हें प्रेरित करना और उनसे जुड़ाव बनाना है।
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