मनोरंजन
एक घंटा पहले
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विचारों
फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपने कॉलेज के दिनों का एक दिलचस्प और रोमांचक किस्सा सुनाया है। यह वाकया उस दौर का है, जब वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने बताया कि किस तरह एक मामूली-सी बात ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि उन्हें अगवा तक कर लिया गया।
पोस्टर से शुरू हुआ पूरा विवाद
इम्तियाज अली के मुताबिक, इस पूरे झगड़े की जड़ एक राजनीतिक पोस्टर था। हॉस्टल की मुख्य दीवार पर लगा यह पोस्टर हटाकर दूसरी जगह लगा दिया गया था, और यही बात विवाद की वजह बन गई। दूसरे गुट के लड़कों ने इसे लेकर ठान ली और मामला तूल पकड़ता चला गया।
रात दो बजे साइकिल रिक्शा में अगवा
फिल्ममेकर ने बताया कि उन्हें एक साइकिल रिक्शा में बैठाकर अगवा कर लिया गया। रात के करीब दो बजे विरोधी गुट के लड़के उन्हें एक सरकारी क्वार्टर में ले गए, जहां गैंग लीडर मौजूद था। माहौल पूरी तरह डरावना था, लेकिन इम्तियाज ने हिम्मत नहीं हारी।
सच बोलने पर बच गई जान
गैंग लीडर के सामने जब इम्तियाज से पूछताछ हुई, तो उन्होंने बिना डरे साफ-साफ सच कह दिया कि उन्होंने पोस्टर फाड़ा नहीं था, बल्कि सिर्फ उसे हटाया था। उनकी इसी ईमानदारी का असर हुआ। गैंग लीडर ने पाया कि उसके अपने ही आदमी ने झूठ बोला है, और उसने झूठ बोलने पर अपने ही साथी को थप्पड़ जड़ दिया। इस तरह इम्तियाज अली बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बच निकले।
नई फिल्म की तैयारी में जुटे
इस यादगार किस्से को साझा करने वाले इम्तियाज अली इन दिनों अपनी नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की रिलीज की तैयारियों में व्यस्त हैं।
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