नीले रंग का वो हीरो, जिससे दूर भागते थे निर्माता; लगातार सुपरहिट फिल्में देकर हिला दिया था अमिताभ-धर्मेंद्र का सिंहासन मनोरंजन एक महीने पहले 104
मुंबई के दादर स्टेशन पर उतरने वाले एक साधारण से सांवले लड़के ने कैसे संघर्ष के दम पर हिंदी सिनेमा में अपना एक अलग साम्राज्य स्थापित किया, जानिए मिथुन चक्रवर्ती के 'डिस्को डांसर' बनने की पूरी कहानी।

यह कहानी भारतीय सिनेमा के उस बेताज बादशाह की है, जिसने मायानगरी मुंबई की चकाचौंध में कदम तो रखा था लेकिन उसके पास सिर छुपाने की जगह तक नहीं थी। साल 1969 की एक सुहानी सुबह जब एक सांवला सा युवक दादर रेलवे स्टेशन पर उतरा, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी किस्मत किस कदर करवट लेने वाली है। उस वक्त उस युवक को देखकर दादर स्टेशन के एक कुली ने महज एक मजाकिया अंदाज में 'हीरो' कहकर पुकारा था। किसी को क्या पता था कि कुली के मुंह से निकला यह शब्द एक दिन हकीकत का रूप ले लेगा। हम बात कर रहे हैं सदाबहार अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की, जिन्होंने 80-90 के दशक में बॉलीवुड पर एकछत्र राज किया और तत्कालीन दिग्गज अभिनेताओं जैसे अमिताभ बच्चन, जीतेंद्र और धर्मेंद्र के साम्राज्य को हिला कर रख दिया था।

दादर स्टेशन के कुली की वो भविष्यवाणी जो सच साबित हुई

मिथुन चक्रवर्ती ने अपने जीवन के इस बेहद खास और भावुक कर देने वाले किस्से को एक पुराने साक्षात्कार में साझा किया था। उन्होंने बताया था कि वह 11 सितंबर 1969 को मुंबई के दादर स्टेशन पहुंचे थे। उस समय वह मुंबई में अपने चाचा के घर रहने के लिए आए थे। जैसे ही वह ट्रेन से नीचे उतरे, स्टेशन पर मौजूद एक कुली ने उनका सामान उठाने के लिए उन्हें आकर्षित करने के उद्देश्य से आवाज लगाई, 'ऐ हीरो, इधर आओ!' इसके बाद जब वह स्टेशन से बाहर निकले, तो रिक्शे वाले भी उन्हें इसी तरह 'हीरो' कहकर बुलाने लगे। वास्तव में, यह मुंबई के कुलियों और रिक्शे वालों का यात्रियों को बुलाने का एक आम और दोस्ताना तरीका था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उस गरीब कुली के मुंह से निकले वे शब्द मिथुन चक्रवर्ती के लिए एक वरदान बन गए और आगे चलकर उन्होंने खुद को हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े नायकों में स्थापित कर लिया।

सांवले रंग के कारण जब निर्माताओं ने फेर लिया था मुंह

मुंबई में मिथुन चक्रवर्ती का शुरुआती सफर कांटों से भरा हुआ था। उन्होंने फिल्म इंस्टीट्यूट से अभिनय की पढ़ाई तो की थी और वह नृत्य कला में भी माहिर थे, लेकिन उनका रंग सांवला था। उस दौर में बॉलीवुड में गोरे-चिट्टे नायकों का बोलबाला था। कई बड़े फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने तो मिथुन को देखते ही खारिज कर दिया था। संघर्ष के दिनों में उनके पास रहने के लिए घर नहीं था और वह फुटपाथ पर सोकर रातें गुजारते थे। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती थी कि लोग उनके चेहरे के रंग को न देखकर उनके अभिनय और नृत्य कौशल पर ध्यान दें। उनकी किस्मत का सितारा तब चमका जब मशहूर निर्देशक मृणाल सेन ने साल 1976 में अपनी फिल्म 'मृगया' में उन्हें मुख्य भूमिका दी। इस फिल्म में उन्होंने एक आदिवासी युवक का किरदार निभाया और अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्होंने प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर लिया।

'नीला हीरो' कहकर उड़ाया जाता था मजाक

राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद भी मिथुन चक्रवर्ती की राह आसान नहीं थी। उन्हें मुख्यधारा के सिनेमा में जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स और निर्माता उनके सांवले रंग के कारण उनके नाम से ही दूर भागते थे। प्रसिद्ध निर्देशक और निर्माता केसी बोकाड़िया ने एक साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया था कि उनकी फिल्म 'प्यार झुकता नहीं' को खरीदने के लिए कोई भी वितरक तैयार नहीं था। दिल्ली के एक बड़े फिल्म वितरक ने तो केसी बोकाड़िया के मुंह पर ही कह दिया था कि 'सिनेमाघरों में गोरा हीरो चलता है, यह नीला हीरो भला कहां चलेगा?' उस दौर में कई फिल्म वितरक मिथुन चक्रवर्ती को 'नीला हीरो' कहकर पुकारते थे। हालांकि, केसी बोकाड़िया को अपने गुरु के आशीर्वाद और मिथुन की प्रतिभा पर पूरा भरोसा था। उनकी यह फिल्म साल 1985 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इतिहास रचते हुए पूरे 50 हफ्ते तक थिएटर्स में चलती रही। इस फिल्म की अपार सफलता के बाद मिथुन चक्रवर्ती को दर्शकों के बीच एक बेहद संवेदनशील और भावुक अभिनेता के रूप में पहचान मिली और उन्हें पारिवारिक कहानियों पर आधारित फिल्मों के ढेरों प्रस्ताव मिलने लगे।

'डिस्को डांसर' बनकर दुनियाभर में मचाई धूम

साल 1979 में आई फिल्म 'सुरक्षा' में मिथुन चक्रवर्ती ने अपने बेहतरीन नृत्य प्रदर्शन से दर्शकों को दीवाना बना दिया था। उस समय की नामी फिल्म पत्रिकाओं ने उनके बारे में लिखा था कि 'एक नए सितारे का जन्म हो चुका है।' लेकिन उन्हें वैश्विक स्तर पर असली पहचान साल 1982 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'डिस्को डांसर' से मिली। 17 दिसंबर 1982 को रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन और निर्माण बब्बर सुभाष ने किया था, जो मिथुन चक्रवर्ती के करियर में उनके सबसे बड़े मददगार और गॉडफादर साबित हुए। इस फिल्म के जरिए मिथुन ने रातोंरात एक वैश्विक सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया। फिल्म में उनका ब्रेक डांस और डांस करने का अनोखा अंदाज युवाओं के सिर चढ़कर बोलने लगा। यह वह दौर था जब हिंदी फिल्मों के मुख्य अभिनेता आमतौर पर स्क्रीन पर खुलकर डांस नहीं करते थे, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती ने इस पुरानी परंपरा को पूरी तरह से तोड़ दिया। 'डिस्को डांसर' को न केवल भारत में बल्कि सोवियत संघ यानी रूस और कई अन्य देशों में भी अभूतपूर्व लोकप्रियता मिली। यह पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी जिसने दुनिया भर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन करके एक नया रिकॉर्ड बनाया था।

अंतिम पंक्ति के दर्शकों के चहेते सुपरस्टार

अस्सी और नब्बे के दशक में जब अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और जीतेंद्र जैसी बड़ी तिकड़ी का फिल्म उद्योग पर पूरी तरह से नियंत्रण था, तब मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी दमदार अदाकारी और जन-समर्थन के बल पर उनके सिंहासन को हिलाकर रख दिया। छोटे शहरों और कस्बों के दर्शकों के बीच मिथुन चक्रवर्ती की लोकप्रियता चरम पर थी। उन्होंने निम्नलिखित ब्लॉकबस्टर फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर अपनी धाक जमाई:

  • जागीर
  • गुलामी
  • स्वर्ग से सुंदर
  • मुद्दत
  • वतन के रखवाले
  • वक्त की आवाज
  • प्यार का मंदिर
  • जीते हैं शान से
  • दाता
  • दलाल

उनकी व्यस्तता और स्टारडम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके करियर के एक दौर में एक ही साल के भीतर उनकी रिकॉर्ड 19 फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थीं, जो अपने आप में एक अनोखा कीर्तिमान है।

अनोखे रिकॉर्ड, ढेरों फ्लॉप फिल्में और फिर भी बरकरार रहा जादू

अपने लंबे फिल्मी सफर में मिथुन चक्रवर्ती ने 370 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। दिलचस्प बात यह भी है कि उनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है; जहां एक तरफ उनकी 150 से ज्यादा फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल यानी फ्लॉप साबित हुईं, वहीं दूसरी तरफ उनके स्टारडम और लोकप्रियता में कभी कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई। उनकी करीब 150 फिल्में सिनेमाघरों में गोल्डन जुबली और डायमंड जुबली मनाने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने अपने पूरे करियर में बेहतरीन अभिनय के लिए तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीता, जो उनकी बेमिसाल अभिनय क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

निजी जीवन के उतार-चढ़ाव और प्रेम संबंध

मिथुन चक्रवर्ती की निजी जिंदगी भी हमेशा से ही मीडिया और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय रही है। उन्होंने अपने जीवन में दो बार शादी की। उनकी पहली शादी अभिनेत्री हेलेना ल्यूक से हुई थी, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण यह शादी छह माह भी नहीं चल सकी और जल्द ही दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने साल 1976 में अभिनेत्री योगिता बाली के साथ दूसरी शादी रचाई। योगिता बाली की भी यह दूसरी शादी थी; इससे पहले वह मशहूर पार्श्व गायक किशोर कुमार की पत्नी थीं।

फिल्म उद्योग में काम करने के दौरान मिथुन चक्रवर्ती का नाम उस दौर की सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री श्री देवी के साथ भी काफी लंबे समय तक जोड़ा गया। मीडिया में तो यहां तक अफवाहें उड़ी थीं कि मिथुन चक्रवर्ती के दबाव में आकर ही श्री देवी ने निर्माता बोनी कपूर को राखी बांधी थी। अपने इस बहुचर्चित अफेयर पर मिथुन चक्रवर्ती ने एक साक्षात्कार के दौरान बहुत ही सधे हुए शब्दों में अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि 'अखबारों में जो भी बातें और अफवाहें लिखी जाती हैं, उनमें से कुछ गलत होती हैं तो कुछ सही भी होती हैं। मैं खुद को एक मैरिड बैचलर यानी शादीशुदा कुंवारा मानता हूं।'

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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