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एक घंटा पहले
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विचारों
मुंबई के चर्चित फिल्म निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह जानना जरूरी है कि इस आंदोलन के पीछे वाकई न्याय की लड़ाई है या कोई छिपा हुआ राजनीतिक मकसद। पंडित के मुताबिक जनता के आंदोलनों के नाम पर कुछ लोग अपना सियासी फायदा साधने में जुटे हुए हैं।
अशोक पंडित ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि वह इस पार्टी को जितना नजदीक से देख रहे हैं, इसके इरादों पर उनका शक उतना ही गहरा होता जा रहा है। उन्होंने साल 2010 के अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद यह देश का सबसे बड़ा आंदोलन था, जिसमें पूरा देश एकजुट होकर खड़ा हुआ था। इसी आंदोलन से अरविंद केजरीवाल एक बड़े चेहरे के रूप में उभरे, मगर इसके बाद हालात पूरी तरह बदल गए।
केजरीवाल पर सीधा आरोप
अशोक पंडित का सीधा आरोप है कि अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे के उस पवित्र आंदोलन को अपनी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि जिस शख्स को कभी नए भारत का चेहरा बताया जा रहा था, वही आगे चलकर शराब घोटाले के मामले में फंस गया और उसे जेल तक जाना पड़ा।
इसके बाद उन्होंने देशभर में चल रहे पेपर लीक के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। पंडित ने कहा कि पेपर लीक का मामला बेहद शर्मनाक है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी अपने सियासी हितों के चक्कर में इस असली मुद्दे को भटका रही है।
आंदोलन से जुड़े संदिग्ध चेहरे
पंडित ने कहा कि इस आंदोलन से जुड़े कई चेहरों का रिकॉर्ड पहले से ही दागदार रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें से किसी ने उमर खालिद की तारीफ की है तो कोई जांच के दायरे में है। उन्होंने यहां तक कहा कि अब यह आंदोलन आम जनता के गुस्से से ज्यादा 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का रीयूनियन नजर आ रहा है।
दिल्ली चुनाव में केजरीवाल की हार का हवाला देते हुए अशोक पंडित ने कहा कि केजरीवाल की राजनीतिक जमीन अब खिसक रही है, इसी वजह से वह अपनी साख बचाने के लिए कोई नया मुद्दा तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए विपक्षी नेता जनता को भड़काकर फायदा उठाना चाहते हैं।
अशोक पंडित के अनुसार, जब अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे नेताओं को जनता का असली समर्थन नहीं मिल पा रहा है, तब वे ऐसे आंदोलनों का सहारा लेकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।
जनता को चेतावनी
अंत में उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, देश में इस तरह के धरने-प्रदर्शन अचानक बढ़ने लगेंगे। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी विदेशी कलाकारों, टूलकिट और हाइवे जाम करके किस तरह सियासी नाटक रचा गया था, जो चुनाव खत्म होते ही गायब हो गया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर सिर्फ मुखौटे बदलते हैं, लेकिन पीछे का असली चेहरा हमेशा वही बना रहता है।
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