उपनाम: आत्मनिर्भर
सोशल मीडिया की रील से चमकी किस्मत, 2 लाख के कर्ज से शुरू की दुकान, अब सालाना 5 लाख तक की कमाई
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक युवा ने सोशल मीडिया पर मिले बिजनेस आइडिया से प्रभावित होकर कपड़ों का काम शुरू किया और आज वह आत्मनिर्भर बनकर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।
कोलकाता से रांची तक का सफर: 20 साल की मेहनत और हुनर से उषा ने खड़ी की सफलता की इबारत
रांची की रहने वाली उषा ने दो दशक पहले घर से सिलाई का काम शुरू किया था, जो आज 5,000 रुपये तक के डिजाइनर ब्लाउज बनाकर एक बड़ी पहचान बन चुकी हैं।
60 साल की उम्र में मिट्टी के चूल्हे पर जलेबी बनाकर मिसाल बनीं सबंदो बाई, संघर्ष से बदल दी जिंदगी
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 60 वर्षीय सबंदो बाई मिट्टी के चूल्हे पर देसी जलेबी बनाकर सम्मान की आजीविका कमा रही हैं। कभी मजदूरी करके दो वक्त की रोटी के लिए जूझने वाली अम्मा अब अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
यूट्यूब से सीखा हुनर बना कमाई का जरिया, 19 साल की नेहा का पेपर आर्ट बिजनेस आज बना मिसाल
झारखंड के बोकारो की रहने वाली 19 वर्षीय नेहा बरनवाल ने कोरोना काल में यूट्यूब से क्विलिंग आर्ट सीखा और आज वह इसे ऑनलाइन माध्यमों से बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
रांची के कुलदीप का कमाल: महज 2 डेसिमल जमीन पर उगा रहे 15 तरह की सब्जियां, दूध और पनीर के लिए भी नहीं है बाजार पर निर्भर
रांची निवासी कुलदीप ने अपनी छोटी सी जमीन पर किचन गार्डन विकसित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, जहां वे जैविक खाद और स्मार्ट तकनीकों से भरपूर सब्जियां उगा रहे हैं।
पाली के हेमावास गांव में महिलाओं का दम, चूड़ी उद्योग से बदल रही हैं तकदीर
राजस्थान के पाली जिले के हेमावास गांव की महिलाएं आज चूड़ी उद्योग के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। करीब 2 हजार महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं और उनके हुनर की तारीफ खुद रेल मंत्री भी कर चुके हैं।
सुल्तानपुर की बेटी आर्या कसौधन का कमाल, पेंटिंग की कला से कमा रही हैं नाम और दाम
सुल्तानपुर की रहने वाली आर्या कसौधन ने अपनी बहन से प्रेरित होकर चित्रकारी के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाया है। आज वह ऑनलाइन पेंटिंग्स बेचकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और कई पुरस्कार भी जीत चुकी हैं।
साइकिल पर 45 साल से चल रही गाड़ी धोने की दुकान, बोकारो के अजय घर-घर पहुंचकर चमकाते हैं वाहन
बोकारो के 65 वर्षीय अजय कुमार मिश्रा अपनी साइकिल पर ही गाड़ी धोने का पूरा सेटअप लेकर घूमते हैं और पिछले 45 वर्षों से बाइक, कार से लेकर बड़े वाहनों तक की धुलाई कर रहे हैं।
खुद कभी थे दिहाड़ी मजदूर, आज बने मसीहा; फिरोजाबाद के कांच उद्योगपति ने भटकते श्रमिकों को दी नई राह
फिरोजाबाद के एक कांच उद्योगपति ने काम की तलाश में चौराहों पर भटकने वाले दिहाड़ी मजदूरों को मुफ्त हैंडीक्राफ्ट कारीगर बनाने की अनूठी पहल शुरू की है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी।