मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
38 साल का समर्पण
छतरपुर जिले के रहने वाले Rambabu Ahirwar आज अपने आसपास के 10 गांवों में एक मिसाल बन चुके हैं। पेशे से एक पशु चिकित्सक के रूप में कार्यरत Rambabu Ahirwar पिछले 38 सालों से पशुओं की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं। वे बताते हैं कि उन्हें पशु विभाग में सेवाएं देते हुए लंबा समय हो गया है और इस दौरान पशुओं के प्रति उनका लगाव और गहरा होता गया है।
काम के प्रति जुनून
Rambabu Ahirwar अपनी सरकारी जिम्मेदारी के अलावा भी पशुओं की निजी सेवा जारी रखते हैं। उनकी कार्यशैली के बारे में कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:
- उनकी ड्यूटी का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक है।
- ड्यूटी के बाद और रात के 2 बजे तक भी अगर कोई उन्हें बुलाता है, तो वे तुरंत इलाज के लिए निकल जाते हैं।
- वे अपने घर से 10 किलोमीटर दूर तक भी बीमार पशुओं को देखने के लिए चले जाते हैं।
- ज्यादातर मामलों में पशुपालक उन्हें लेने के लिए स्वयं उनके घर पहुंच जाते हैं।
सफर की शुरुआत
अपने करियर के बारे में बात करते हुए Rambabu Ahirwar बताते हैं कि साल 1989 में उन्होंने लवकुश नगर के पशु चिकित्सा केंद्र से अपनी नौकरी शुरू की थी। उस दौर में 280 रुपए महीने का वेतन मिलता था, जो धीरे-धीरे बढ़कर 600 और 700 रुपए हुआ। Rambabu Ahirwar के अनुसार, साल 1992 में उन्हें स्थाई नौकरी मिली थी। वर्तमान में उन्हें 60,000 रुपए मासिक वेतन मिल रहा है, जिसका श्रेय वे पशुओं की सेवा से मिले आशीर्वाद को देते हैं।
इलाज का अनुभव और संकल्प
Rambabu Ahirwar को पशुओं का इलाज करते हुए 32 साल हो चुके हैं। वे मुख्य रूप से गलघोंटू, मुंहपका-खुरपका और बुखार जैसी समस्याओं का उपचार करते हैं। वे कहते हैं कि जब पशु अस्पताल नहीं पहुंच पाते, तो वे खुद उनके पास जाकर निःशुल्क सेवा प्रदान करते हैं। ड्यूटी के दौरान वे केवल अस्पताल की दवाओं का मामूली खर्च ही लेते हैं। रिटायरमेंट में अभी ढाई साल बाकी हैं, लेकिन उन्होंने प्रण लिया है कि वे ताउम्र इसी तरह पशुओं की सेवा करते रहेंगे।
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