झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
खेती में नवाचार की मिसाल
झारखंड के बोकारो जिले में खेती का तरीका बदल रहा है। जिले के पेटरवार प्रखंड के रहने वाले किसान तारेश्वर महतो ने अरबी की खेती को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया है। उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि इलाके के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है। तारेश्वर महतो बताते हैं कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है और वे स्वयं भी एक समर्पित किसान हैं। पिछले 10 साल से वे बड़े स्तर पर अरबी की खेती कर रहे हैं और लगातार इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
फसल का चक्र और बुवाई
तारेश्वर महतो के अनुसार, उन्होंने इस साल फरवरी के महीने में अरबी की बुवाई की थी। अरबी की फसल पककर तैयार होने में आमतौर पर 5 से 6 महीने का समय लेती है। उन्होंने बताया कि इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय और कम लागत में बंपर पैदावार देने की क्षमता रखती है। उन्होंने कुल 70 डिसमिल जमीन पर अरबी की खेती की है, जिससे उन्हें उम्मीद से बेहतर उत्पादन मिला है।
लागत और कमाई का गणित
खेती के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए किसान ने बताया कि 70 डिसमिल क्षेत्र में अरबी लगाने में लगभग 10 हजार रुपये का खर्च आता है। अगर सही तरीके से देखरेख की जाए, तो इतने क्षेत्र से 50 क्विंटल से अधिक अरबी का उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में अरबी की मांग बनी रहती है और यह औसतन 20 से 25 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक जाती है। इस हिसाब से, फसल की बिक्री से कुल 1,25,000 रुपये की आमदनी होती है। यदि इसमें से 10 हजार रुपये की लागत निकाल दी जाए, तो किसान को सीधे तौर पर 1,15,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है। वे अपनी तैयार फसल को स्थानीय पेटरवार हाट में बेचते हैं, जहाँ उन्हें अच्छे ग्राहक मिल जाते हैं।
दोहरी कमाई का जरिया
अरबी की खेती अन्य फसलों के मुकाबले अधिक फायदेमंद क्यों है, इसका कारण इसके पत्ते हैं। तारेश्वर बताते हैं कि अरबी की जड़ के साथ-साथ इसके पत्तों की भी बाजार में खूब मांग रहती है। लोग अरबी के पत्तों की सब्जी और पकौड़े बड़े चाव से खाते हैं। इस तरह, मुख्य फसल तैयार होने से पहले ही पत्तों की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी शुरू हो जाती है। यह दोहरी आय किसान को अन्य फसलों की तुलना में अधिक समृद्ध बनाती है।
देखभाल और सावधानियां
हालांकि अरबी की खेती लाभदायक है, लेकिन इसमें मेहनत और निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। तारेश्वर ने बताया कि अन्य फसलों की तुलना में इसमें समय अधिक देना पड़ता है। किसान को नियमित सिंचाई की व्यवस्था करने के साथ-साथ खरपतवार निकालने और समय-समय पर खाद-पानी की निगरानी करनी पड़ती है। यदि किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखे, तो अरबी की फसल से साल दर साल शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है।
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