छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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स्मार्ट मीटर पर बिलासपुर में बढ़ता विरोध
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर के इस्तेमाल को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में कवर्धा जिले के एक गांव में ग्रामीणों द्वारा स्मार्ट मीटर का पुरजोर विरोध किया गया था और अब ऐसी ही स्थिति बिलासपुर जिले में भी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि जब से उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, तब से बिजली के बिल में अप्रत्याशित और कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपनी नाराजगी जाहिर की है।
उपभोक्ताओं की बढ़ती मुश्किलें
इस पूरे मामले को समझने के लिए जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई। बातचीत के दौरान बिलासपुर के कई उपभोक्ताओं ने खुलकर अपनी परेशानी साझा की। उनका कहना है कि पुराने मीटर के मुकाबले स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल में बहुत ज्यादा अंतर आया है। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए बिजली का बढ़ा हुआ बिल एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है। उपभोक्ताओं ने इस मुद्दे पर बिजली विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है और मीटरों की तत्काल तकनीकी जांच करने की अपील की है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
संजय यादव का अनुभव: 300 से बढ़कर 1900 तक बिल
उपभोक्ता संजय यादव ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि पहले उनके घर का बिजली बिल सामान्यतः 300 से 400 रुपये के बीच आता था। हालांकि, स्मार्ट मीटर स्थापित किए जाने के बाद स्थिति बदल गई है। पिछले चार-पांच महीनों से लगातार उन्हें 1800 से 1900 रुपये तक का बिजली बिल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के अकेले कमाने वाले व्यक्ति हैं और बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ऐसे में बिल की यह भारी बढ़ोतरी उनके मासिक घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है। संजय के अनुसार, उन्होंने विभाग में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकला है।
19500 रुपये का बिल देख हैरान हुए प्रफुल तिवारी
प्रफुल तिवारी नामक एक अन्य उपभोक्ता ने भी अपनी परेशानी जाहिर की। उनका कहना है कि आमतौर पर उनके घर का बिल 2000 से 3500 रुपये के आसपास आता था। लेकिन पिछले दो महीनों में एक बिल ऐसा आया जिसने उन्हें हिलाकर रख दिया, यह बिल 19500 रुपये तक पहुंच गया था। उनका तर्क है कि भले ही उन्होंने घर में एक नया एसी लगवाया है, लेकिन इतनी बड़ी राशि का बिल आना पूरी तरह से समझ से परे है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे सरकार और विभाग का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन इसके उलट उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।
डेढ़ से दोगुना तक बढ़ा बिजली का बिल
उपभोक्ता अनुरुद्ध राजपूत ने बताया कि उनके घर में केवल सीमित बिजली उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जाता है, फिर भी बिल में कोई कमी नहीं है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही उनके घर का बिल पहले की तुलना में डेढ़ से दोगुना तक पहुंच गया है। उन्होंने बिजली विभाग से मांग की है कि स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच की जानी चाहिए। उनका सुझाव है कि जब तक मीटर की सटीकता पूरी तरह से प्रमाणित न हो जाए, तब तक उपभोक्ताओं के घरों में इनका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
बरसात के मौसम में भी राहत नहीं
उपभोक्ता छवि कश्यप ने एक और हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि पहले उनके घर का बिल महीने का 200 से 300 रुपये आता था, लेकिन अब दो महीने का संयुक्त बिल 7500 रुपये तक पहुंच गया है। छवि ने तर्क दिया कि बरसात के मौसम में बिजली की खपत गर्मी के मुकाबले काफी कम हो जाती है, इसके बावजूद बिल में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मीटरों की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि समस्या बरकरार रहती है, तो पुरानी व्यवस्था यानी पुराने मीटरों को वापस लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।
जांच और सुधार की मांग
बिलासपुर के विभिन्न इलाकों से सामने आ रहे ये दावे संकेत देते हैं कि स्मार्ट मीटर के संचालन में कहीं न कहीं तकनीकी या प्रक्रियात्मक खामियां जरूर हैं। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने मांग की है कि बिजली विभाग को इन मीटरों की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और मीटर की रीडिंग में सुधार नहीं किया जाता है, तो यह विरोध और अधिक उग्र हो सकता है। फिलहाल, सभी प्रभावित उपभोक्ता बिजली विभाग के सकारात्मक कदम और अपनी शिकायतों के जल्द समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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