हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के हवाण क्षेत्र में एक गरीब परिवार को कथित रूप से धनराशि का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का मामला उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि परिवार को आर्थिक मदद और अन्य फायदों का लालच देकर धर्मांतरण के लिए उकसाने का प्रयास किया गया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
पुलिस ने की मामले की पुष्टि
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले के हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
दोषी पाए जाने पर कितनी सजा
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यदि जांच के दौरान आरोप सही साबित होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों को 5 से 10 वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है।
संगठनों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले के सामने आने के बाद बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न हिन्दू संगठनों ने गहरी चिंता जताई है और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की मांग की है। समाजसेवी संगठनों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और सीधे-सादे लोगों को लालच देकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित करने वाली घटनाओं पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
कानून बनाने वाला पहला राज्य
धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में इस दिशा में कानूनी पहल की गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस कानून को और कड़ा बनाने के मकसद से इसमें संशोधन किया था। हिमाचल की तर्ज पर देश के कई अन्य राज्यों ने भी धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किए हैं।
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