हिमाचल प्रदेश में नशे पर नकेल कसने की तैयारी, 19 लाख की मशीन से 5 मिनट में खुलेगा ड्रग्स का राज हिमाचल प्रदेश एक महीने पहले 66
बिलासपुर जिला प्रशासन ने एक अत्याधुनिक ड्रग टेस्टिंग सिस्टम खरीदने का फैसला किया है जो मौके पर ही छह प्रकार के नशों की पहचान कर सकेगा।

ड्रग्स के खिलाफ बिलासपुर प्रशासन की बड़ी पहल

हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरों को देखते हुए बिलासपुर जिला प्रशासन ने एक सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने एक बेहद आधुनिक और पोर्टेबल सोटॉक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तकनीक के आने से राज्य में नशे के विरुद्ध जारी अभियान को एक नई गति और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह मशीन विशेष रूप से चिट्टा जैसे खतरनाक नशों के सेवनकर्ताओं और तस्करों पर नकेल कसने में पुलिस की मदद करेगी।

मशीन की खासियतें और कार्यप्रणाली

उपायुक्त राहुल कुमार के अनुसार, करीब 19 लाख रुपये की लागत वाली इस मशीन को जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफटी के माध्यम से खरीदा जा रहा है। यह सिस्टम मुख्य रूप से व्यक्ति की लार के नमूनों का परीक्षण करता है और मात्र 5 मिनट के भीतर सटीक परिणाम देने में सक्षम है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक साथ छह प्रकार के नशों की पहचान कर सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मेथामफेटामीन जिसे आमतौर पर चिट्टा कहा जाता है
  • एम्फेटामीन
  • बेंजोडायजेपाइन
  • कैनाबिस यानी भांग
  • कोकीन
  • अफीम

इस तकनीक के माध्यम से अब भांग का सेवन करने वालों को भी आसानी से पकड़ा जा सकेगा, जो पहले कई बार पुलिस की पकड़ से बच जाते थे।

मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जल्द ही इस एडवांस्ड टेस्टिंग सिस्टम का आधिकारिक उद्घाटन कर सकते हैं। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि नशे के व्यापार और इसके सेवन के प्रति शून्य सहनशीलता बरती जाए। प्रशासन का मानना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल तस्करों के नेटवर्क को नष्ट करना नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में फंसने से सुरक्षित रखना भी है। बिलासपुर इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने वाला हिमाचल प्रदेश का पहला जिला बनने जा रहा है।

डेटा विश्लेषण और भविष्य की रणनीति

उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि इस सिस्टम में AI आधारित विश्लेषण करने की क्षमता भी मौजूद है। शुरुआती दौर में केवल एक मशीन ट्रायल के आधार पर तैनात की जाएगी। इसके बाद प्राप्त परिणामों के आधार पर भविष्य में और भी मशीनें खरीदने का निर्णय लिया जाएगा। इस जांच प्रक्रिया से जो डेटा एकत्र होगा, उसका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा ताकि नशे के हॉटस्पॉट, तस्करी करने के नए तौर तरीके और उभरते हुए ट्रेंड्स की पहचान की जा सके। यह महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस प्रशासन के साथ साझा की जाएगी, जिससे संगठित ड्रग माफियाओं के खिलाफ टारगेटेड और सटीक कार्रवाई करने में काफी सहायता मिलेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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