बीकानेर का प्राचीन पंचमुखा हनुमान मंदिर: रातीघाटी युद्ध के समय जमीन में छिपाई गई थी प्रतिमा, जानिए 100 साल पुराना इतिहास धर्म एक घंटा पहले 5
बीकानेर के रानीबाजार इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित प्राचीन पंचमुखा हनुमान मंदिर का इतिहास रातीघाटी युद्ध से जुड़ा है। खेत में खुदाई के दौरान मिली इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए रोजाना भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम

राजस्थान के बीकानेर शहर में स्थित रानीबाजार इंडस्ट्रियल एरिया में बना प्राचीन पंचमुखा हनुमान जी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए अपार श्रद्धा और अटूट विश्वास का केंद्र बना हुआ है। इस प्रसिद्ध मंदिर का ऐतिहासिक संबंध रातीघाटी युद्ध से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, युद्ध काल के समय परकोटे से बाहर बने प्रमुख मंदिरों की मूर्तियों को आक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जगह-जगह छिपा दिया गया था। उसी दौर में पंचमुखा हनुमान जी की इस अलौकिक प्रतिमा को भी जमीन के अंदर सुरक्षित रूप से दबा दिया गया था, ताकि इसे किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सके।

खेत में विश्राम के दौरान महसूस हुई दिव्य ऊर्जा

प्रतिमा के पुनः प्रकट होने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। स्थानीय कथाओं के अनुसार, युद्ध समाप्त होने के काफी समय बाद माली समाज के एक भोपा जी खेत में विश्राम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें वहां एक अद्भुत और दिव्य ऊर्जा की अनुभूति हुई। भोपा जी को यह आभास हुआ कि जमीन के नीचे कोई विशेष और पवित्र वस्तु मौजूद है। इसके बाद जब उस स्थान पर खुदाई का काम शुरू करवाया गया, तो जमीन के भीतर से हनुमान जी की पांच मुखों वाली प्राचीन प्रतिमा निकली। प्रतिमा के प्रकट होते ही स्थानीय लोगों ने वहां पूजा-अर्चना शुरू की और एक छोटा सा मंदिर बनाकर प्रतिमा को स्थापित कर दिया।

100 साल पहले बना था निज मंदिर, अब हुआ जीर्णोद्धार

समय बीतने के साथ-साथ इस स्थान के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था लगातार गहरी होती चली गई। लगभग 100 वर्ष पहले मीणा नाम के एक परम भक्त ने यहां विधिवत निज मंदिर का निर्माण करवाया था। जैसे-जैसे साल बीतते गए, यहां आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ती गई। मंदिर की ऐतिहासिक प्राचीनता और इसके उच्च धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए हाल ही में इसका भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है। इस पूरे कायाकल्प में स्थानीय युवाओं की टीम ने काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मंदिर के रखरखाव और धार्मिक आयोजनों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पंचमुखा सेवा संस्थान का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष राहुल गहलोत हैं।

250 किलोग्राम की गदा और महादेव का मंदिर

मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं का ध्यान एक बेहद विशाल गदा पर जाता है। इस गदा का कुल वजन लगभग 250 किलोग्राम है। यह भारी-भरकम गदा हनुमान जी के पराक्रम, असीम शक्ति और शौर्य के प्रतीक के रूप में यहां स्थापित की गई है, जिसे देखकर भक्त अभिभूत हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, मंदिर प्रांगण के भीतर ही महादेव जी का एक सुंदर मंदिर भी स्थित है, जहां श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन करने के बाद भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

पंचमुखों का धार्मिक महत्व और विशेषताएं

धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं में हनुमान जी के पांच मुख वाले रूप की विशेष महिमा बताई गई है। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा में पांच अलग-अलग मुख विराजित हैं, जिनमें से प्रत्येक मुख का अपना एक विशेष धार्मिक अर्थ और महत्व है:

  • हनुमान मुख: यह मुख मुख्य रूप से साहस, भक्ति, असीम शक्ति और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
  • नरसिंह मुख: यह स्वरूप भक्तों को हर प्रकार के भय, डर और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है और धर्म की विजय का संदेश देता है।
  • गरुड़ मुख: धार्मिक मान्यता के अनुसार, गरुड़ मुख की पूजा से सर्प दोष, विषैले तत्वों और विष बाधाओं से रक्षा मिलती है।
  • वराह मुख: इस मुख को पृथ्वी की रक्षा, जीवन में स्थिरता लाने और भक्तों को अचानक आने वाले संकटों से उबारने वाला माना जाता है।
  • हयग्रीव मुख: यह स्वरूप विद्या, उच्च ज्ञान, बुद्धि और अध्यात्म से जुड़ा हुआ है।

पंचमुखा हनुमान जी की नियमित उपासना करने से भक्तों को जीवन में हर तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलती है और उन्हें साहस, ज्ञान तथा सुरक्षा की प्रेरणा प्राप्त होती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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