बिहार के किसानों के लिए सुनहरा मौका: मसाला फसलों की खेती पर मिलेगा ₹40000 तक का अनुदान बिहार एक महीने पहले 66
बिहार में उद्यान निदेशालय द्वारा बीज मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना शुरू की गई है, जिसके तहत धनिया, मेथी, सौंफ और अजवाइन उगाने पर किसानों को भारी सब्सिडी दी जा रही है।

बिहार में मसाला खेती को मिला सरकारी प्रोत्साहन

बिहार के बेगूसराय जिले में कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय ने बीज मसाला फसलों की खेती पर विशेष अनुदान देने की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य केंद्र धनिया, मेथी, सौंफ और अजवाइन जैसी फसलों की पैदावार को बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि पारंपरिक फसलों के साथ इन वैकल्पिक मसाला फसलों को अपनाने से किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा, क्योंकि बाजार में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।

सब्सिडी और लक्ष्य का पूरा ब्यौरा

बेगूसराय के जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अमरजीत कुमार राय के अनुसार, इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले को एक स्पष्ट लक्ष्य आवंटित किया गया है। विभाग ने कुल 125 हेक्टेयर भूमि पर मसाला खेती का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके वितरण का विवरण इस प्रकार है:

  • धनिया की खेती के लिए 50 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
  • मेथी की खेती के लिए 25 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है।
  • सौंफ की खेती के लिए 25 हेक्टेयर आवंटित किए गए हैं।
  • अजवाइन की खेती के लिए 25 हेक्टेयर का क्षेत्र निर्धारित है।

इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर खेती की इकाई लागत ₹50 हजार तय की गई है। इस पर सरकार 40 प्रतिशत अनुदान दे रही है, जिसका सीधा अर्थ है कि किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹20 हजार की आर्थिक सहायता मिलेगी। एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि के लिए इस सब्सिडी का लाभ उठा सकता है, जिससे किसी एक पात्र किसान को कुल ₹40 हजार तक का अनुदान प्राप्त हो सकता है।

आवेदन करने की प्रक्रिया और शर्तें

इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया अपनानी होगी। आवेदन के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना अनिवार्य है:

  • सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में बिहार कृषि ऐप को डाउनलोड करें।
  • आवेदन की पूरी प्रक्रिया इसी ऐप के माध्यम से ऑनलाइन संपन्न होगी।
  • विभाग ने पहले आओ, पहले पाओ की नीति लागू की है।
  • जैसे ही निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा, उसके बाद विभाग किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें ताकि वे इस सरकारी सहायता का लाभ उठा सकें।

कुल बजट और सरकार का उद्देश्य

कृषि विभाग के आधिकारिक पत्रों के अनुसार, राज्य योजना मद से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना पर बेगूसराय जिले में लगभग ₹25 लाख की राशि खर्च की जाएगी। सरकार का दृष्टिकोण केवल मसाला फसलों के उत्पादन में वृद्धि करना ही नहीं है, बल्कि किसानों को परंपरागत खेती के दायरे से बाहर निकालकर अधिक मुनाफा देने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित करना भी है। मसाला फसलों की बाजार में स्थिर और निरंतर मांग किसानों के लिए इसे एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बनाती है। यह योजना न केवल फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की उत्पादकता और उनके परिवार की खुशहाली में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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