राबड़ी देवी के नए सरकारी आवास की चर्चा: बंगले के भीतर है पुरानी मजार बिहार एक दिन पहले 4
बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी जल्द ही अपने नए सरकारी बंगले में शिफ्ट होने वाली हैं। इस बंगले के परिसर में एक पुरानी मजार स्थित है, जिसे वर्षों से किसी ने हटाने की जहमत नहीं उठाई।

नए घर में शिफ्ट होने की तैयारी

बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी जल्द ही 10 सर्कुलर रोड स्थित अपना सरकारी आवास छोड़कर 39 हार्डिंग रोड पर स्थित नए बंगले में जाने वाली हैं। इस नए आवास की सबसे खास बात यह है कि इसके परिसर के भीतर ही एक पुरानी मजार मौजूद है। खास बात यह है कि इस बंगले में पहले रहने वाले किसी भी मंत्री ने कभी इस मजार को हटाने की कोशिश नहीं की।

तेजी से चल रहा मरम्मत का कार्य

नए बंगले को पूरी तरह से व्यवस्थित करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। इस समय 50 से अधिक मजदूर दिन-रात बंगले को नया रूप देने में जुटे हैं। इस बंगले में कुल 8 कमरे हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ग्राउंड फ्लोर पर एक विशेष कमरा तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें सीढ़ियां चढ़ने की परेशानी न हो। राबड़ी देवी ने पहले ही प्रशासन से लालू यादव के स्वास्थ्य को देखते हुए विशेष प्रबंध करने की मांग की थी।

सुविधाओं से लैस है नया बंगला

नया आवास काफी खुला और विशाल है, जिसमें हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर में अलग-अलग प्रजातियों के फूल और पौधे लगाए गए हैं। एक बड़े गार्डन की मौजूदगी के कारण यहां मॉर्निंग वॉक करना आसान होगा। इसके अलावा परिसर में पालतू जानवरों को रखने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी गई है। आवास में स्टोर रूम, किचन और सर्वेंट एरिया की भी व्यवस्था है, साथ ही सभी कमरों में अटैच बाथरूम की सुविधा दी गई है।

बंगले का इतिहास और वर्तमान स्थिति

यह बंगला 39 हार्डिंग रोड बिहार सरकार द्वारा मंत्रियों को आवंटित किए जाने वाले सबसे बड़े आवासों में गिना जाता है। इससे पहले यहां रामसूरत राय, शमीम अख्तर, विनोद नारायण झा और चंद्रमोहन राय जैसे नेता रह चुके हैं। फिलहाल बंगले में नए मार्बल लगाने से लेकर पेंटिंग और फिनिशिंग का काम जोर-शोर से जारी है। बंगले में सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ के रहने के लिए भी अलग से इंतजाम किए गए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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