बेटे को सांप ने डसा तो मां ने मुंह से जहर चूसकर बाहर निकाला, जान बचाने की जद्दोजहद में दोनों की हालत गंभीर बिहार एक महीने पहले 73
बिहार के पूर्णिया में एक मां ने अपने 18 वर्षीय बेटे की जान बचाने के लिए खुद की परवाह किए बिना जहरीले सांप का जहर मुंह से चूसकर बाहर निकाला, जिससे अब दोनों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

मातृशक्ति का अद्भुत साहस

मां का प्रेम दुनिया में सबसे निस्वार्थ माना जाता है, और जब बच्चे की जान पर आ बनती है, तो एक मां मौत को भी चुनौती देने से पीछे नहीं हटती। अक्सर फिल्मों में देखा जाता है कि नायक अपनी नायिका को बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया जिले से सामने आई एक सच्ची घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। यहाँ एक मां ने अपने 18 वर्षीय बेटे की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जान को दांव पर लगा दिया। इस साहसी महिला के जज्बे की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।

सांप के डसने पर मां ने दिखाई हिम्मत

यह मामला पूर्णिया के रौटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बौलान प्याजी गांव का है। शुक्रवार की सुबह 18 वर्षीय शहजाद आलम अपने पिता शाह आलम के घर से अपनी मां शहजादी के साथ खेतों की ओर मवेशियों के लिए चारा लेने निकला था। दोनों गांव के नजदीक स्थित बांध पर पहुंचे थे कि तभी एक जहरीले सांप ने शहजाद को काट लिया। शुरुआत में शहजाद को सांप के काटने का एहसास नहीं हुआ, लेकिन थोड़ी देर बाद जब उसने पास में ही फन फैलाए सांप को देखा, तो वह डर गया और तुरंत अपनी मां को इस घटना की जानकारी दी।

जहर निकालने के लिए किया संघर्ष

बेटे पर आई मुसीबत को देखकर मां शहजादी का दिल दहल गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बिना किसी देरी के उन्होंने अपने पास मौजूद हंसुआ से बेटे के घाव पर एक हल्का चीरा लगाया। इसके बाद उन्होंने मुंह से उस घाव को बार-बार चूसकर खून और जहर बाहर निकालना शुरू कर दिया। मां लगातार यह कोशिश करती रही कि बेटे के शरीर से जहर निकल जाए। इस पूरी प्रक्रिया में मां लगातार खून को मुंह में भरकर बाहर थूकती रही ताकि उसका बेटा सुरक्षित रह सके। इस दौरान मां ने अपनी सुरक्षा की तनिक भी चिंता नहीं की। हालांकि, जहर के प्रभाव और इस प्रयास के कारण कुछ ही देर में मां और बेटे, दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। मां के दर्द भरे शोर को सुनकर ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और तत्काल परिवार वालों को सूचित किया गया।

अस्पताल में भी बेटे की चिंता में डूबी मां

गांव वालों की मदद से मां और बेटे को फौरन इलाज के लिए किशनगंज सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां पहुंचने पर उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी और डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया। डॉ. कृष्णानंद तीर्थांकर ने जानकारी दी कि फिलहाल दोनों मां-बेटे की स्थिति स्थिर है, लेकिन वे अभी भी खतरे के घेरे में हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान भी मां का पूरा ध्यान खुद पर नहीं, बल्कि अपने बेटे की सलामती पर था। वह बार-बार डॉक्टरों से अपने बेटे को बचाने की गुहार लगा रही थी। मां की यह ममता देखकर अस्पताल में मौजूद स्टाफ और डॉक्टरों की भी आंखें नम हो गईं। घटना की खबर सुनते ही गांव के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए और दोनों की सलामती के लिए प्रार्थना करने लगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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