बिहार: मंत्री दीपक प्रकाश को मिली बड़ी राहत, राज्यपाल ने विधान परिषद के लिए किया मनोनीत बिहार एक घंटा पहले 2
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर उठ रहे संवैधानिक संकट के बीच राज्यपाल ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी सदस्यता पर सवाल उठाए जाने के बाद उठाया गया है।

दीपक प्रकाश का हुआ मनोनयन

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर राज्य की राजनीति में चल रहे सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है। राज्यपाल ने उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य यानी MLC के तौर पर मनोनीत कर दिया है। इस आशय की अधिसूचना निर्वाचन विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है। यह निर्णय बिहार सरकार की विशेष अनुशंसा पर बुधवार को लिया गया। गौरतलब है कि दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। उनके मनोनयन का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब उनकी मंत्री पद पर बरकरार रहने की योग्यता को लेकर कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज थीं और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर कड़ी टिप्पणी की थी।

उपेंद्र कुशवाहा ने जताया आभार

अपने बेटे दीपक प्रकाश के विधान परिषद सदस्य मनोनीत होने पर उपेंद्र कुशवाहा ने खुशी जाहिर की है और प्रमुख नेताओं का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि दीपक प्रकाश को यह जिम्मेदारी मिलने पर वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने LJP (R) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी का भी विशेष शुक्रिया अदा किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दीपक प्रकाश पूर्ण समर्पण के साथ जनसेवा करते हुए बिहार की जनता के हितों को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।

कार्यकाल और संवैधानिक स्थिति

बिहार गजट में प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (ङ) तथा खंड (5) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह नियुक्ति की है। यह सीट भाजपा नेता देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दीपक प्रकाश का यह कार्यकाल 16 मार्च, 2027 तक प्रभावी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा था दबाव

यह मनोनयन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से तीखे सवाल किए थे। कोर्ट ने यह जानना चाहा था कि आखिर दीपक प्रकाश बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री पद पर कैसे काबिज हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मंत्री पद की शपथ लेता है, तो उसे 6 महीने के भीतर राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। निर्धारित अवधि के भीतर सदन की सदस्यता हासिल न कर पाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को अपना पद छोड़ना पड़ सकता है, जिस वजह से सरकार के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप