कांग्रेस बनाम कांग्रेस: राहुल गांधी से मुलाकात न होने की नाराजगी, दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर प्रदर्शन की तैयारी राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 6
बिहार कांग्रेस के नेताओं ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते 8 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा भवन पर प्रदर्शन की तैयारी है। नेता प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी को हटाने की मांग कर रहे हैं और राहुल गांधी से समय न मिलने से बेहद नाराज हैं।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष

जब भी देश में चुनावी सरगर्मियां तेज होती हैं, कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी विवाद अक्सर सार्वजनिक हो जाते हैं। इस बार ऐसा ही एक वाकया बिहार कांग्रेस से निकलकर सामने आया है, जो न केवल पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती है बल्कि आने वाले राजनीतिक भविष्य के लिए भी चिंता का विषय है। बिहार कांग्रेस के नेता अब अपनी ही पार्टी की कार्यशैली के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि पार्टी कार्यकर्ता दिल्ली स्थित मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।

क्यों मचा है बवाल?

बिहार में कांग्रेस की स्थिति साल 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही बेहद नाजुक बनी हुई है। इन चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और वह महज 6 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस के पास 19 सीटें थीं, लेकिन 2025 में आई भारी गिरावट ने पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। नाराज नेताओं का स्पष्ट कहना है कि बिहार प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार को तुरंत उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन नेताओं के नेतृत्व में पार्टी को केवल नुकसान हुआ है।

राहुल गांधी से मुलाकात की जिद

विवाद का एक बड़ा पहलू पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क न हो पाना भी है। नाराज नेताओं का आरोप है कि वे लंबे समय से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक मुलाकात का अवसर नहीं मिला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य आनंद माधव ने कहा कि वे नवंबर 2025 से लगातार शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी खींचतान के चलते अब नेताओं ने दिल्ली आकर विरोध जताने का फैसला किया है।

8 सितंबर को होगा बड़ा प्रदर्शन

नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 8 सितंबर की तारीख तय की है, जिस दिन वे नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर एक शांतिपूर्ण धरना देंगे। इस प्रदर्शन में बिहार के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी शामिल होंगे। आयोजकों का दावा है कि यह विरोध प्रदर्शन पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है ताकि हाईकमान बिहार की जमीनी हकीकत को समझ सके।

पहले भी मिल चुका है आश्वासन

प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। 3 नवंबर 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत के साथ एक बैठक हुई थी। उस दौरान शीर्ष नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि उनकी शिकायतों पर गौर किया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इतने समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कार्यकर्ताओं का सब्र का बांध टूट गया है।

कौन-कौन से नेता हैं शामिल?

इस विरोध प्रदर्शन को कई पुराने और दिग्गज नेताओं का समर्थन प्राप्त है। धरने में बिहार कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष जमाल अहमद और राजकुमार राजन, एआईसीसी सदस्य नागेंद्र पासवान, पूर्व विधायक छत्रपति यादव और बी. अख्तर जैसे नाम शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव एवं पूर्व विधायक अनिल कुमार सिंह भी इस आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

नेतृत्व पर क्यों उठे सवाल?

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश कुमार की अपनी साख पर भी संकट है क्योंकि वह खुद पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। चुनाव में करारी हार के बाद से ही संगठन के भीतर बदलाव की मांग उठती रही है। एआईसीसी सदस्य किशोर कुमार झा ने इन प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि ये समर्पित कांग्रेसी हैं और उनकी बातों को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह सलाह भी दी कि इस विवाद को सार्वजनिक मंच के बजाय आपसी बातचीत से सुलझाना पार्टी के हित में बेहतर होगा। अब देखना यह है कि क्या 8 सितंबर के प्रदर्शन के बाद पार्टी हाईकमान बिहार इकाई में कोई बड़ा बदलाव करता है या यह विरोध प्रदर्शन पार्टी के लिए और बड़ी मुसीबत खड़ी करेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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