भोपाल में ओला, उबर और रैपिडो चालकों की हड़ताल खत्म: गैर-व्यावसायिक वाहनों पर लगेगा प्रतिबंध, ड्राइवरों की कमाई में होगी बढ़ोतरी मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 2
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी चालकों की दो दिवसीय हड़ताल समाप्त हो गई है। सरकार के साथ हुई बैठक में निजी वाहनों पर रोक लगाने और ड्राइवरों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत बढ़ाने पर सहमति बनी है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दो दिनों से चल रही ओला, उबर और रैपिडो चालकों की हड़ताल आखिरकार बुधवार को समाप्त हो गई है। राज्य के परिवहन विभाग और टैक्सी यूनियनों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद शहर में चरमराई कैब सेवाएं एक बार फिर से सामान्य होने की उम्मीद है। सबसे राहत की बात यह है कि इस फैसले से आम यात्रियों की जेब पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

निजी वाहनों के खिलाफ 24 घंटे में शुरू होगी कार्रवाई

टैक्सी चालकों के विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह ऐप आधारित कंपनियों द्वारा गैर-व्यावसायिक यानी निजी (सफेद नंबर प्लेट वाले) वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करना था। टैक्सी यूनियन का आरोप था कि इससे व्यावसायिक लाइसेंस वाले ड्राइवरों के हक का नुकसान हो रहा है। बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि भोपाल में ऐसी निजी कारों और दोपहिया वाहनों को ऐप से हटाने की कार्रवाई आगामी 24 घंटे के भीतर शुरू कर दी जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कमर्शियल कोटे के तहत पंजीकृत न होने वाले वाहनों से बुकिंग लेने वाली कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील सिंह चौहान के अनुसार, भोपाल शहर में वर्तमान में लगभग 700 दोपहिया वाहन और करीब 60 से 70 चार पहिया वाहन ऐसे हैं जो निजी श्रेणी के होने के बावजूद ऐप पर अवैध रूप से टैक्सी बनकर चल रहे हैं। चालक दल लंबे समय से इन पर नकेल कसने की मांग कर रहा था।

ड्राइवरों को मिलेगा 15% ज्यादा कमीशन

बैठक में ड्राइवरों की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके लाभांश को तत्काल प्रभाव से 15 प्रतिशत बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस वृद्धि का पूरा खर्च कंपनियां वहन करेंगी और इसका कोई भी बोझ आम ग्राहकों के किराए पर नहीं डाला जाएगा। यानी यात्रियों को यात्रा के लिए पहले जितना ही किराया चुकाना होगा, जबकि ड्राइवरों की जेब में अधिक पैसे जाएंगे। ईंधन की कीमतों और वाहन की मरम्मत के बढ़ते खर्चों के बीच ड्राइवरों के लिए यह एक बड़ी आर्थिक राहत है।

कमीशन में हुई इस बढ़ोतरी के गणित को इस प्रकार आसानी से समझा जा सकता है:

  • यदि किसी बुकिंग के एवज में कंपनी को यात्री से 100 रुपये प्राप्त होते हैं और उसमें से ड्राइवर को पहले 45 रुपये मिलते थे, तो अब 15% की वृद्धि के बाद ड्राइवर को 51.75 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
  • इसी तरह, पहले मिलने वाले 50 रुपये के हिस्से के स्थान पर अब ड्राइवरों को सीधे 57.50 रुपये मिलेंगे।

दो दिनों तक यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

इस हड़ताल के कारण पिछले दो दिनों से भोपाल रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख स्थानों पर यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। लोगों को कैब बुकिंग मिलने में काफी समय लग रहा था या फिर बुकिंग रद्द हो रही थी। इस विकट स्थिति का फायदा उठाकर कई स्थानीय ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से मनमाना और अत्यधिक किराया वसूलने की शिकायतें भी प्रशासन को मिली थीं। हालांकि, अब हड़ताल समाप्त होने से स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

तैयार की जाएगी नई किराया नीति

प्रशासन और टैक्सी एसोसिएशन के बीच हुई इस बैठक में यह भी तय किया गया है कि मध्य प्रदेश के लिए एक नई और व्यावहारिक किराया नीति तैयार की जाएगी। इसके लिए देश के अन्य विकसित राज्यों में ऐप आधारित टैक्सियों के लिए लागू किराया प्रणालियों का अध्ययन किया जाएगा। इस विस्तृत अध्ययन के बाद ही राज्य के लिए एक नई रेट लिस्ट जारी की जाएगी, जिससे ड्राइवरों की आय सुनिश्चित हो सके और यात्रियों को भी उचित दाम पर सुरक्षित सफर मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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