मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
मध्य प्रदेश कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक निर्णय
मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन के भीतर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पार्टी ने राज्य स्तर पर चल रहे अपने सभी करीब 40 विभागों, मोर्चों और प्रकोष्ठों (सेल्स) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यही नहीं, इनके अंतर्गत काम करने वाली जिला स्तरीय और अन्य सभी निचली इकाइयों को भी समाप्त कर दिया गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह कदम संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने और उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जीत के बावजूद संगठन में सर्जरी के मायने
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की थी। इस जीत से पार्टी ने अपनी सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा था। आम तौर पर चुनाव में जीत के बाद संगठन को भंग नहीं किया जाता, लेकिन इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी आलाकमान अब कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है और संगठन की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन चाहती है। इस पुनर्गठन के जरिए पार्टी उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना चाहती है जो जमीन पर सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि इस नई टीम में कई नए चेहरों को भी मौका मिलने की पूरी संभावना है।
क्या है जीतू पटवारी की भविष्य की रणनीति
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस बदलाव के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के मार्गदर्शन में 'संगठन सृजन अभियान' चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गहन समीक्षा के बाद नेतृत्व ने यह निर्णय लिया है कि सभी विभागों और प्रकोष्ठों की इकाइयों को भंग किया जाए ताकि एक मजबूत ढांचे का निर्माण किया जा सके। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की नजर साल 2028 के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों पर टिकी है। पार्टी का मानना है कि इन चुनावों में बेहतर परिणाम पाने के लिए एक अनुशासित और सक्रिय संगठन का होना अपरिहार्य है। जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी के नए स्वरूप का ऐलान किया जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी ने कसा तंज
कांग्रेस के इस बड़े संगठनात्मक फेरबदल पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रवक्ता अजय यादव ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि पार्टी को अब अपने ही संगठन और कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं बचा है। उन्होंने आगे कहा कि सभी विभागों और प्रकोष्ठों को एक साथ भंग करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर भारी गुटबाजी और नेतृत्व की विफलता है। भाजपा के मुताबिक, यह कदम केवल हार या हताशा को छिपाने का एक प्रयास है, लेकिन कांग्रेस अपने संगठनात्मक संकट से उबरने में विफल रही है। बहरहाल, आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जीतू पटवारी की नई टीम जनता के बीच किस तरह की पैठ बना पाती है।
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